शतावरी घृत के फायदे ,खुराक और नुकसान | Shatavari Ghrita ke fayde

शतावरी घृत बनाने के लिए शतावरी के पेस्ट को दूध और गाय के घी में पकाया जाता है। शतावर आयुर्वेद की जानी मानी रसायन औषधि है। इसके सेवन से शरीर में बल और धातुओं की वृद्धि होती है। यह पौष्टिक है और पुरुषों द्वारा इसका सेवन वीर्य, शुक्र, और यौन शक्ति को बढाता है। महिलाओं द्वारा इसका सेवन प्रजनन अंगों सहित पूरे स्वास्थ्य को अच्छा करता है।

शतावरी घृत के फायदे ,खुराक और नुकसान | Shatavari Ghrita ke fayde
Shatavari Ghrita ke fayde

शतावरी घृत के फायदे , प्रयोगखुराक और नुकसान | Shatavari Ghrita ke fayde | Shatavari Ghrita benefits,uses,dosage and disadvantages in hindi

शतावरी घृत एक आयुर्वेदिक घृत या घी है। भैषज्य रत्नावली में वर्णित विधि के अनुसार शतावरी घृत बनाने के लिए शतावरी के पेस्ट को दूध और गाय के घी में पकाया जाता है। शतावर आयुर्वेद की जानी मानी रसायन औषधि है। इसके सेवन से शरीर में बल और धातुओं की वृद्धि होती है। यह पौष्टिक है और पुरुषों द्वारा इसका सेवन वीर्य, शुक्र, और यौन शक्ति को बढाता है। महिलाओं द्वारा इसका सेवन प्रजनन अंगों सहित पूरे स्वास्थ्य को अच्छा करता है।

शतावरी घृत के सेवन से शरीर में अधिक पित्त और वात (पित्त और वात विकार) के कारण होने वाले विकार दूर होते है। इसके सेवन से शरीर में ताकत आती है। यह पौष्टिक होने के साथ-साथ शरीर के भीतर की रूक्षता को दूर करता है और कब्ज़ से राहत देता है। यह पाचक और बस्ती को शुद्ध करता है। यह धातुक्षीणता को दूर करता है और शरीर को सबल बनता है।

शतावरी धृत के घटक द्रव्य और उनकी मात्रा :-

1.शतावरी का रस या काढ़ा – 500 मि.लि.

2.गो दुग्ध – 500 मि.लि.

3.गो घृत – 250 मि.लि.

4.जल (पानी) – 500 मि.लि.

5.जीवक – 5 ग्राम

6.ऋषभक – 5 ग्राम

7.मेदा (Meda) – 5 ग्राम

8.महामेदा – 5 ग्राम

9.काकोली – 5 ग्राम

10.क्षीर काकोली – 5 ग्राम

11.मुनक्का – 5 ग्राम

12.मुलहठी – 5 ग्राम

13.मुद्गपर्णी – 5 ग्राम

14.माषपर्णी – 5 ग्राम

15.विदारीकन्द – 5 ग्राम

16.लाल चन्दन – 5 ग्राम

बनाने की विधि :-

जीवक से जीवक तक सभी 12 द्रव्यों का कल्क बना लें फिर शतावरी का काढ़ा, दूध, गोघृत व कल्क मिला कर घृत पाक सिद्ध करें। जब घृत सिद्ध हो जाए तब छान कर ठण्डा कर लें।

शतावरी घृत के फायदे और उपयोग : Shatavari Ghrita benefits and Uses (labh) in Hindi

1.बल, वीर्य, वर्ण तथा अग्नि की वृद्धि करता है और शरीर को पुष्ट, सुडौल और शक्तिशाली बनाता है।

2.शतावरी धृत रक्तप्रदर एवं अति ऋतुस्राव को सामान्य करने वाला तथा शीतलता प्रदान करने वाला है।

3.स्त्रियों के लिए शतावरी धृत योनिशूल, योनिशोथ (योनि मे सूजन) और योनि विकार नाश करने वाला है।

4.अती उष्णता, पित्तजन्य दाह के कारण स्त्रियों का योनि मार्ग दूषित हो जाता है ,जिसके परिणामस्वरूप पुरुष के शुक्राणु गर्भाशय तक पहुँचने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। इसी प्रकार पुरुष के वीर्य में शुक्राणु नष्ट होते रहते हैं।शतावरी घृत के नियमित सेवन से स्त्री व पुरुष दोनों को ही उत्तम लाभ होता है और स्त्री गर्भ धारण करने में सक्षम हो जाती है।

5.शतावरी धृत शुक्राणुओं की कमी (Oligospermia) को दूर कर यह शुक्राणुओं (sperms) की संख्या बढ़ाता है।

6.शतावरी धृत उत्तम पौष्टिक, शीतवीर्य और वाजीकरण यानी पौरुष शक्ति वर्द्धक औषधि है।

7.रक्त पित्त, वात रक्त, अंग में दाह, ज्वर, पित्त प्रकोप, पित्त जन्य पेशाब में रुकावट आदि रोगों का शमन करने के लिए यह घृत सफल सिद्ध हुआ है।

शतावरी घृत के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Shatavari Ghrita?)

एक चम्मच घृत (10 ग्राम )

शतावरी घृत के सेवन का तरीका (How to Use Shatavari Ghrita?)

शतावरी धृत सेवन करते समय एक चम्मच घृत में एक चुटकी पिसी शक्कर और 3 से 4 बूंद शहद मिला कर सुबह शाम मीठे ठण्डे दूध के साथ सेवन करें।

शतावरी घृत के नुकसान (Side Effects of Shatavari Ghrita):-

शतावरी घृत के अत्यधिक मात्रा में सेवन से मतली (जी मिचलाना) व सिर दर्द जैसी समस्या पैदा हो सकतीहै।

शतावरी घृत कैसे प्राप्त करें ? ( How to get Shatavari Ghrita)

यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

कहाँ से खरीदें  :-  अमेज़ॉन,नायका,स्नैपडील,हेल्थ कार्ट,1mg Offers,Medlife Offers,Netmeds Promo Codes,Pharmeasy Offers,

ध्यान दें :- Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको शतावरी घृत के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |