निवेश में धोखे से कैसे बचें (How to avoid investment frauds)

आज आपको कुछ साधारण किस्म के धोखों से बचने के उपायों के बारे में बताते हैं जो कि अक्सर आपके एजेंट (Agents) कर जाते हैं। निवेश और बीमा में अक्सर गुमराह करके प्लान बेच दिया जाता है. जानकारी के अभाव में अकसर एजेंट द्वारा जो बताया जाता है उसी पर ग्राहक विश्वास करा लेता है. यहाँ हम आपको निबेश में धोखे से बचने के कुछ उपाय बता रहे हैं जिससे कि आप जब निवेश करें तो सावधान रहें और धोखा ना खाएं.

निवेश में धोखे से कैसे बचें (How to avoid investment frauds)
How to avoid investment frauds

निवेश में धोखे से कैसे बचें (How to avoid investment frauds)

 आज आपको कुछ साधारण किस्म के धोखों से बचने के उपायों के बारे में बताते हैं -

मेरे एक मित्र ने निवेश (Invest) तो किया था म्युचुअल फंड (Mutual Fund) में मगर एजेंट (Agent )ने उन्हें यूलिप (Ulip) बेच दिया। कई बार ऐसा होता है कि एजेंट Agent सपने तो किसी और प्लान या प्रोडक्ट के दिखाते हैं मगर जब वास्तव में आपके पास निवेश के कागज पहुंचते हैं तो उसमें कुछ और ही निकलता है। कई निवेशक (Investors)तो आलस के कारण या जानकारी न होने के कारण प्राप्त कागजों को देखते भी नहीं कि उन्हें जो निवेश के कागजात मिले हैं उनमें सब कुछ सही है कि नहीं।

आपको हमने पहले भी इस बात के लिये आगाह किया था कि कैसे कुछ एजेंट (Agent) बड़े बड़े वादे करके कुछ भी बेच देते हैं। यह भी बताया था कि किस तरह से अपने एजेंट का चुनाव करें। इसके बाद जब आप कोई निवेश करते हैं निवेश के कागज़ प्राप्त होने के बाद क्या करना है आज हम आपको वही बताना चाहते हैं:

1.जिस स्कीम में निवेश किया था क्या यह वही है :- बहुत जरूरी है यह जांचना कि आपने जिस स्कीम में देखभाल कर और अपनी जरूरत के हिसाब से निवेश किया था क्या प्राप्त कागजात उसी स्कीम में निवेश हुए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि एजेंट ने अपनी कमीशन के चक्कर में आपको कोई ऐसा प्लान दे दिया हो जो आपकी जरूरतों के मुताबिक ही न हो। यहां म्युचुअल फंड और यूलिप (ULIP) में अंतर को समझना भी जरूरी है। म्युचुअल फंड (Mutual Funds) मध्यम समय (पांच से सात वर्ष) के लिये निवेश के लिये उत्तम हैं और यूलिप (Ulip) दस साल या उससे अधिक समय के लिये। यूलिप (Ulip) में पहले वर्ष में ज्यादा चार्जेज कटते हैं मगर लम्बी अवधी में यूलिप म्यूचल फंड से भी ज्यादा फायदेमंद भी साबित हो सकता है।

2.बाकी जानकारी भी देखें :- अच्छी तरह से देख लें कि आपका नाम, आपका पता, जन्म की तारीख, संपर्क नंबर, नामित व्यक्ति (nominee) का नाम जैसी जरूरी जानकारी सही से भरी है कि नहीं। याद रखें कि यदि आपने कभी कोई बीमा या यूलिप लिया है और इनमें से कोई जानकारी सही नहीं है तो क्लेम लेने में कई तरह की दिक्कतें भी आ सकती हैं। कुछ कंपनियां आपके द्वारा भेजे गये फार्म की कापी भी करवा कर आपको भेजतीं हैं उसे भी अच्छी तरह जांच लें कि आपके फार्म भरने के बद एजेंट ने उस में कोई बदलाव तो नहीं किये हैं।

 

3.प्लान के नियम शर्तें :- बहुत लंबी, उबाउ और कानूनी भाषा मे लिखे यह नियम व शर्तें जरूर पढ़ें। कुछ समझ न आये तो किसी जानकार से उसके बारे में जानने से परहेज न करें। अधिकतर कंपनियां कस्टमर्स केयर नंबर भी देतीं हैं वहां संपर्क करें या स्वंय कंपनी के कार्यालय/शाखा में जायें।

4.शुल्क तथा प्रभार :- यह भी देख लें कि जैसा बताया गया था क्या शुल्क तथा प्रभार वैसे ही लगे हैं या ज्यादा लगे हैं। भविष्य में लगने वाले प्रभारों की भी जानकारी लें।

इस सब को देखने के बाद और सब कुछ सही पाने के बाद अपने कागजों को संभाल कर रखें। हो सके तो किसी प्लास्टिक की फाइल या फोल्डर में ही रखें। लकड़ी की अलमारी के बजाये लोहे की अलमारी में रखना ज्यादा सुरक्षित है। जहां भी रखें अपने घर के जिम्मेदार व्यक्तियों को अवश्य बतायें। अपने एजेंट का विजिटिंग कार्ड अपने निवेश के कागजों के साथ रखें जिससे कि समय असमय संपर्क करने में आसानी रहे।