चिलगोजा के फायदे और नुकसान | Chilgoza ke fayde | health benefits of Pine Nuts in hindi

चिरौंजी, पिस्ता, बादाम एवं काजू की ही तरह चिलगोजा से हर भारतीय परिचित है। इसे भी सूखे मेवों के रूप में ही प्रयुक्त किया जाता है। चिलगोजा भी सर्वत्र भारत में सर्व सुलभ होता है। अन्य मेवों की तरह इसे भी ताकत का पर्याय समझकर प्रयोग में लाते हैं।  हमारे यहाँ शक्तिवर्द्धक द्रव्यों का सेवन शीत ऋतु में करते हैं जिससे बल, कांति, शक्ति एवं स्फूर्ति बढ़ती है। इसलिए चिलगोजा को पाक एवं मेवों के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। अत: इसका प्रयोग भी अन्य मेवों की तरह शीत ऋतु में ही प्रयुक्त करते हैं जिससे शक्ति बढ़कर सप्त धातुएं रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा एवं शुक्र बढ़कर रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है- जिससे शरीर रोगी नहीं होता। है। इसके साथ-साथ औषधियुक्त पाकों एवं औषधियों में भी इसका प्रयोग बहुतायत से प्राचीन-काल से होता आ रहा है।

चिलगोजा के फायदे और नुकसान | Chilgoza ke fayde | health benefits of Pine Nuts in hindi
Chilgoza ke fayde

चिलगोजा के फायदे और नुकसान | Chilgoza ke fayde | health benefits of Pine Nuts in hindi

चिलगोजा क्या है (What is Pine Nuts?) :-  

(Chilgoza )चिलगोजा का इस्तेमाल मेवे के रूप में होता है। यह एक पौष्टिक तथा स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ एक औषधि भी है। चिलगोजा के तेल का भी प्रयोग औषधि के रूप में होता है। चिलगोजे के वृक्ष मध्यम आकार के होते हैं। चिलगोगा के वृक्ष लगभग 24 मीटर ऊंचे, एवं 3 मीटर चौड़े, तथा मध्यम आकार होते हैं। पेड़ की छाल पतली, चिकनी, खुरदरी, और भूरे रंग की होती है। इसके पत्ते तीन गुच्छों वाले और कठोर होते हैं। चिलगोजा के वृक्ष में फरवरी से दिसम्बर तक फूल, और फल होते हैं। चिलगोजा के बीज वृक्षों से नीचे गिरते हैं। इन्हीं बीजों को बाजार में बेचा जाता है। चिरौंजी की ही तरह चिलगोजा के फल आधे इंच आकार के होते हैं। इस पर भी चिरौंजी के फल की ही तरह कठोर छिलका होता है। छिलका तोड़कर उसमें से। गिरी को निकालकर फिर इसका ही प्रयोग किया जाता है। गिरी बहुत ही स्वादिष्ट और शक्तिवर्द्धक होती है। शीतऋतु में चिलगोजा प्रयुक्त करने से शरीर में उष्णता तथा ताकत आती है।

 चिलगोजा की गिरी में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और अनेक प्रकार के खनिज तत्त्व विद्यमान होते हैं। इसकी गिरी में फॉस्फोरस, लौह तत्त्व तथा कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

गिरी से तैल भी निकाला जाता है जिसको औषधि के रूप में भी प्रयुक्त किया जाता है। चिलगोजा भी अन्य मेवों की तरह उष्ण प्रकृति का होता है जिससे ताकत भी मिलती है

यह वात रोगों में भी उपयोगी पाया गया है। इसके साथ-साथ यह सूजन तथा शूल को भी दूर करने में सक्षम पाया गया है। यह पक्षाघात में भी उपयोगी पाया गया है। चिलगोजे खाने से बादाम, चिरौंजी, पिस्ता, काजू की तरह शक्ति अवश्य बढ़ती है अतः ज्यादातर लोग सर्दी के मौसम में इसका प्रयोग अवश्य करते हैं। 

अनेक भाषाओं में चिलगोजा के नाम (Chilgoza Called in Different Languages)

  • हिंदी :– चिलगोजा ;

  • संस्कृत नाम :– निकोचक, निचुल, ग्रहगीता, माङ्गल्य तारा, दारुगन्धा, गन्धमादीनी ;

  • English :– एडिबल पाईन (Edible pine), चिलगोजा पाइन (Chilghoza pine), जिर्राड्स पाइन (Gerard’s pine), चिलगोजा पाईन (Chilgoza pine) ;

  • Scientific Names :– पाइनस जेरार्डिआना (Pinus gerardiana )

  • Urdu :-  चिलगोजाह (Chilgozah)

  • Gujarati :-   चिलगोजा (Chilgoza)

  • Punjabi :-   चिरी (Chiri), गलबोजा (Galboja)

  • Arabic :-   हाबुल सावेराकाबर (Habul saverakabar)

  • Persian :-   चिलगोजाह (Chilgozah)

 

 

चिलगोजा  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- मधुर

  • गुण (Pharmacological Action): - भारी,

  • वीर्य (Potency): - शीत

  • विपाक (transformed state after digestion):- मधुर

चिलगोजा के गुण ( Properties of Pine Nuts) :-  

(Chilgoza )चिलगोजा की गिरी में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और अनेक प्रकार के खनिज तत्त्व विद्यमान होते हैं। इसकी गिरी में फॉस्फोरस, लौह तत्त्व तथा कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

चिलगोजा से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Pine Nuts benefits and Uses (labh) in Hindi

1-नपुंसकता की समस्या, और कामोत्तेजना के लिए चिलगोजा का प्रयोग (Benefits of Chilgoza in Impotent and Sex Related Problem in Hindi)

  1. वर्तमान में कई लोग नपुंसकता, और सेक्स संबंधी विकार से ग्रस्त हैं। अस्वस्थ्य जीवनशैली, अस्वस्थ्य आहार का सेवन, या शारीरिक रोग आदि कई कारण हैं, जिनके कारण लोगों को ऐसी बीमारियां होती हैं। पतंजिल के अनुसार, 1 गिलास दूध में 5-10 ग्राम चिलगोजा गिरी का चूर्ण, तथा मिश्री मिलाकर पीने से वीर्य संबंधी रोग दूर होता है, और वीर्य स्वस्थ होता है।

  2. चिलगोजा (pine seeds) के सेवन से शरीर की कमजोरी दूर होती है, शरीर में उत्तेजना आती है, कामशक्ति (सेक्सुअल पॉवर) पॉवर बढ़ती है। वीर्य की बीमारी ठीक होती है।

  3. धातु की बीमारी में 20-25 बीज की गिरी को दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

  4. जो लोग सेक्सु्ल पॉवर या यौन शक्ति की कमी से परेशान रहते हैं, वे चिलगोजा, बादाम, मुनक्का, छुहारा, तथा अंजीर को मिलाकर दूध में पकाएं। दूध को ठंडाकर लें, और इसमें मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे उनका शरीर स्वस्थ्य होगा, और कामशक्ति में बढ़ोतरी (neja dry fruit benefits) होती है।

2-चिलगोजा के फायदे से होती है शारीरिक कमजोरी दूर (Benefits of Chilgoza to Treat Body Weakness in Hindi)

शारीरिक कमजोरी की शिकायत है तो चिलगोजा का सेवन करें। बच्चे भी चिलगोजा का प्रयोग कर सकते हैं। चिलगोजा की गिरी का सेवन करने से हाथ-पैर की कमजोरी दूर होती है, और शरीर स्वस्थ होता है।

3-चिलगोजा के फायदे से खांसी और दमा का इलाज (Chilgoza Benefits in Fighting with Cough and Asthma in Hindi)

दुनिया भर में दमा रोग से हजारों ग्रस्त हैं। यह एक गंभीर रोग है। चिलगोजा की 5-10 ग्राम गिरी को पीस लें। इसमें शहद मिलाकर सेवन करने से दमा में फायदा होता है। इसे पीने से खांसी में भी आराम मिलता है।

4-चिलगोजा के फायदे से गठिया में लाभ  (Benefits of Chilgoza Dry Fruit in Arthritis Treatment in Hindi)

चिलगोजा (pine seeds) के तेल को लगाने से गठिया का दर्द ठीक होता है |

5-पाचनतंत्र विकार में चिलगोजा के सेवन से लाभ (Pine Nuts Benefits to Treat Digestive Problem in Hindi)

आप जो खाना खाते हैं, उसे पाचनतंत्र पचाने का काम करता है। जब पाचनतंत्र स्वस्थ रहता है, तो भोजन को सही से पचाता है। इसी तरह पाचनतंत्र के बीमार हो जाने पर स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना बन जाती है। चिलगोजा खाने के फायदे (Benefits of Chilgoza) इसमें भी होता है। पाचन क्रिया खराब होने पर चिलगोजा का सेवन करना चाहिए। इससे पाचनतंत्र स्वस्थ रहता है, और सही तरह से काम करता है।

6-उल्टी रोकने के चिलगोजा का सेवन (Chilgoza Dry Fruit Benefits to Stop Vomiting in Hindi)

कोई व्यक्ति उल्टी से परेशान है, तो उसे 18-18 ग्राम त्रिफला, त्रिकटु, दालचीनी, चित्रक, ककुभ मूल, सालिम लेना है। इसके साथ ही बाबूना पुष्प, 100 ग्राम द्राक्षा, 4 ग्राम चिलगोजा मज्जा, तथा 6 ग्राम नारियल लेना है। इनका पेस्ट बना लेना है। इसे पकाकर गाढ़ा करना है। इसमें 375 ग्राम मधु मिलाकर जेली (चटनी) बनाना है। इस जेली (चटनी) को 5-10 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से उल्टी रुक जाती है।

7-वीर्य वृद्धि हेतु :-  

चिलगोजे की गिरी 10-15 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन चबाकर खाने और ऊपर से दूध पीने से वीर्य की वृद्धि होती है तथा किसी भी कारण से उत्पन्न नपुंसकता भी इस प्रयोग से दूर होती है।

8-कब्जी में :-  

आज खान-पान की विषमता से मिथ्या आहार-विहार से कब्ज की। शिकायत आम हो गई है। ऐसी अवस्था में चिलगोजा की २० ग्राम की मात्रा को चबाकर खा लें तथा ऊपर से दूध पी लें। यह प्रयोग मात्र रात्रि को ही करें।

9-पक्षाघात में :-  

पक्षाघात में अंग अपना कार्य सक्रियरूप से नहीं कर पाते हैं- ऐसी अवस्था में चिलगोजा अच्छा कार्य करता है। इसका प्रयोग निम्न प्रकार से करें

चिलगोजा – 10 ग्राम, बादामगिरी – 10 ग्राम,पिस्ता-10 ग्राम,चिरौंजी-10 ग्राम,कुलंजन-10 ग्राम (एक मात्रा)

सभी वस्तुओं की घुटाई करके फिर इसको मधु में डुबों दें। कुछ समय तक डुबा रहने दें। इसके बाद इस लेह को खालें तथा ऊपर से दूध पीलें। ऐसी एक-एक मात्रा को दिन में दो बार तक प्रयुक्त करें।

10-कमजोरी दूर करने हेतु :-  

रोग से बाद की कमजोरी या अन्य कारण से व्याप्त शरीर की कमजोरी में चिलगोजा अच्छा कार्य करती है। अतः इसका प्रयोग निम्न प्रकार से करें।

चिलगोजा-5 ग्राम ,मुनक्का (बीज रहित)-10 नग,पिस्ता -5 ग्राम,( एक मात्रा )

सभी को मिलाकर एक कर लें। इसमें मधु मिलाकर एकजी कर लें तथा अच्छी तरह घोटकर लेह जैसा बना लें। इसको चाट लें तथा ऊपर से दूध पी लें। ऐसी एकएक मात्रा को दिन में दो बार सुबह-शाम प्रयुक्त करें।

11-सूजन में  :-  

सूजन की अवस्था यकृत तथा वृक्क की खराबी से आ जाती है। अतः सूजन की अवस्था में चिल गोजा को निम्न प्रकार से प्रयुक्त करना चाहिए।

चिलगोजा-4 ग्राम,पिस्ता-4 ग्राम,चिरौंजी-4 ग्राम ( एक मात्रा)।

इन सबको मिला लें- फिर इसमें मधु मिलाकर लेह जैसा रख लें। इस लेह का चाट लें। उसके बाद पुनर्नवार (साटा) का चूर्ण 2 ग्राम दूध के साथ अवश्यक सेवन करायें। ऐसी एक-एक मात्रा को दिन में दोबार सुबह एवं शाम को प्रयुक्त करें। एक बात का ध्यान रखें। कि रोगी को नमक बन्द करा दें तो शीघ्र फायदा होगा। यह प्रयोग नियमित रूप से कई दिनों तक करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है।

12-मधुमेह में :-  

(Chilgoza ) मधुमेह जैसी बीमारी में खान-पान का विशेष ध्यान देना पड़ता है, लेकिन यदि आप चिलगोजा का सेवन कर रहे हैं तो निश्चिन्त रहिये क्योंकि और इसमें मौजूद पोषक तत्वों से मधुमेह की समस्या में होने वाले खतरों को कई गुना तक कम किया जा सकता हैं।

एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक पाइन नट्स के प्रयोग से सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी देखी गई। चिलगोजा में कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नेशियम जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं । एक अन्य वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार यह पाया गया कि उपरोक्त तत्वों वाले नट का सेवन अगर किया जाए तो यह डायबिटीज के खतरे को कम कर सकते हैं ।

13-कोलेस्ट्रॉल के लिए :-  

चिलगोजा खाने का तरीका इस्तेमाल कर कोलेस्ट्रॉल को संतुलित किया जा सकता है, क्योंकि चिलगोजा में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बिल्कुल भी नहीं होती है और यही वजह है कि चिलगोजा का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल में बढोत्तरी होने का खतरा कम हो सकता है ।

14-वजन संतुलित करने में :-  

चिलगोजा से बने हुए तेल का सेवन वजन घटाने में अहम भूमिका निभा सकता है। दरअसल, चिलगोजा में पिनोलेनिक एसिड मौजूद होता है और यह 14 से 19 प्रतिशत फैटी एसिड को प्रदर्शित करता है। यह एसिड भूख को नियंत्रित कर वजन को कम करने में मदद कर सकता है । एक अन्य वैज्ञानिक शोध के मुताबिक भी यह कहा गया है कि रोजाना नट पदार्थों के सेवन से वजन घटाने में मदद मिल सकती है ।

15-कैंसर में :-  

चिलगोजे के फायदे कैंसर जैसी गंभीर बिमारी में भी देखने को मिल सकते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, कैंसर जैसी बीमारी से बचने के लिए नट पदार्थों का सेवन लाभदायक हो सकता है । शोध के अनुसार, पाइन नट्स में रेस्वेराट्रोल नमक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होता है, जो कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, पाइन नट्स में उपस्थित फोलिक एसिड डीएनए (DNA) की क्षति को कम कर सकता है ।

16-मस्तिष्क स्वास्थ्य में :-  

(Chilgoza )मस्तिष्क स्वास्थ्य में चिलगोजा खाने के फायदे प्रभावकारी रूप में देखे जा सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार चिलगोजा में ओमेगा-3 एसिड पाया जाता है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को बेहतरीन रूप से चलाने के लिए उपयोगी माना जाता है। चिलगोजा खाने से ओमेगा- 3 फैटी एसिड्स मस्तिष्क के बेहतरीन संचालन, याददाश्त को मजबूत बनाने का काम कर सकता है ।

17-हड्डियों के लिए :-  

चिलगोजा खाने के फायदे हड्डियों की मजबूती के लिए भी देखे जा सकते हैं, क्योंकि चिलगोजा में मौजूद फैटी एसिड हड्डियों के विकास और मजबूती में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार चिलगोजा में पाया जाने वाला ओमेगा-6 फैटी एसिड्स हड्डियों को स्वस्थ रखने के साथ – साथ गठिया जैसे रोग में भी आराम पहुंचा सकता है । इसके अलावा चिलगोजे के फायदे में कैल्शियम भी शामिल है जो हड्डियों की मजबूती और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है ।

18-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए :-  

चिलगोजा का प्रयोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार चिलगोजे में जिंक मौजूद होता है, जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने का काम करता है।

19-आंखों की देखभाल के लिए :-  

चिलगोजे के फायदे में आंखों की देखभाल भी शामिल हो सकते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक आंखों की देखभाल के लिए अगर आप चिलगोजा का सेवन कर रहे हैं, तो इसमें मौजूद ओमेगा-3 आपकी आंखों की मदद कर सकता है। यह आपकी आंखों की नाईट विजन (दृष्टि) और कलर विजन की क्षमता का विकास कर सकता है । इसके अलावा चिलगोजा में विटामिन- ए भी पाया जाता है, जो आंखों की रेटिना में रंजक (आंखों को विभिन्न रंगों को पहचानने की क्षमता) का विकास करता है। इसलिए आंखों की देखभाल के लिए चिलगोजा का प्रयोग किया जा सकता है।

20-एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर :-  

(Chilgoza )एंटीऑक्सिडेंट्स हमारी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने से बचाते हैं। अगर आप चिलगोजा का सेवन कर रहे हैं तो निश्चिंत हो जाइए, क्योंकि चिलगोजे में एंटीऑक्सीडेंट्स (विटामिन ए , विटामिन सी और विटामिन ई) भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं ।

21-त्वचा के लिए :-  

चिलगोजे के फायदे आपको त्वचा के लिए भी लाभ पहुंचा सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक चिलगोजा का इस्तेमाल त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह विटामिन-सी (एस्कॉर्बिक एसिड) का अच्छा स्रोत होता है। विटामिन सी एक एंटीऑक्सीडेंट्स है, जो सूर्य की हानिकारक किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। साथ ही विटामिन सी त्वचा में कोलेजन को बढ़ाता है और एजिंग को कम करता है ।

इसके अलावा चिलगोजे में मौजूद मैंगनीज त्वचा को मुक्त कणों (Free Radicals) से दूर रखने का काम भी कर सकता है।

22-बालों के स्वास्थ्य के लिए :-  

बालों के स्वास्थ्य के लिए भी चिलगोजा खाने के फायदे देखे जा सकते हैं। चिलगोजे में पाया जाने वाला ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड बालों के विकास के लिए उपयोगी हो सकता है । एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, ओमेगा-6 फैटी एसिड बालों को झड़ने से रोकने में मदद करता है और बालों को घना बनाने में भी सहयोग कर सकता है ।

अभी तक आपने जाना कि चिलगोजा खाने के फायदे क्या-क्या हो सकते हैं। आइए अब गर्भावस्था के दौरान चिलगोजा सेवन की स्थिति के बारे में जानते हैं।

23-क्या गर्भावस्था के दौरान चिलगोजा खाना अच्छा होता है? :-  

चिलगोजा जिंक जैसे पोषक तत्व से समृद्ध होता है और जिंक गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास में मदद कर सकता है । गर्भावस्था के दौरान पाइन नट्स का सेवन किया जा सकता है, लेकिन इस दौरान इसे एक दिन में तीन से चार बार ही खाने की सलाह दी जाती है। एक बार में 30 ग्राम पाइन नट्स लिया जा सकता है।

खाने में चिलगोजा का उपयोग कैसे करें – How to Use Pine Nuts in Hindi

चिलगोजा में मौजूद पोषक तत्वों के लिए खाने में चिलगोजा का प्रयोग नियमित रूप से कर सकते हैं। चिलगोजे को विभिन्न व्यंजनों में भी शामिल किया जा सकता है, जैसे-

क्रंची स्वाद के रूप में खाने में चिलगोजा का प्रयोग क्रंची स्वाद पाने के लिए भी किया जा सकता है। चिलगोजे को आप पिज्जा, बिस्कुट, केक आदि में प्रयोग कर खा सकते हैं। इसके साथ-साथ आप इसे आईसक्रीम में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

सलाद की ड्रेसिंग के लिए सलाद की ड्रेसिंग के लिए भी पाइन नट्स का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही साथ फलों की स्मूदी में भी चिलगोजे को शामिल किया जा सकता है।

अन्य रूप में भी चिलगोजे का प्रयोग चिकन कोटिंग और मछली को डीप फ्राई करने के लिए भी किया जा सकता है।

चिलगोजा के सेवन का तरीका (How to Use Pine Nuts?)

(Chilgoza) चिलगोजा का सेवन इस तरह किया जा सकता हैः-

चिलगोजा का चूर्ण- 2-5 ग्राम

आप चिलगोजा का इस्तेमाल कर भरपूर फायदा लेना चाहते हैं, तो इसके इस्तेमाल से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक के सलाह जरूर लें।

चिलगोजा के नुकसान :Side Effects of Pine Nuts

जिस तरह अच्छी चीजों को खाने से शरीर में लाभ होता है, और सामान्य से अधिक मात्रा में सेवन करने से नुकसान हो सकता है। उसी तरह चिलगोजा के अत्यधिक सेवन से भी कुछ हानि हो सकती है, जो ये हैः-

  • चिलगोजा भारी होता है तथा देर में हजम होता है।

  • (Chilgoza) चिलगोजा के अधिक मात्रा में सेवन से मतली व उल्‍टी हो सकती है।

  • इसका सेवन अत्यधिक मात्रा में करने से पेट संबंधित परेशानियां हो सकती हैं।

आप उपरोक्त रोगों की रोकथाम में चिलगोजा का पूरा इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन बेहतर परिणाम के लिए डॉक्टर की सलाह से चिलगोजा का इस्तेमाल करना चाहिए।

चिलगोजा कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Pine Nuts Found or Grown?)

(Chilgoza) चिलगोजा की खेती कई स्थानों पर की जाती है। भारत में उत्तर-पश्चिम में चिलगोजा की खेती होती है। हिमालय में 1800-3000 मीटर की ऊंचाई पर देवदार व चीड़ के वृक्षों के साथ-साथ चिलगोजा भी पाया जाता है। यह विश्व में अफगानिस्तान, बलूचिस्तान एवं पाकिस्तान में भी पाया जाता है।

ध्यान दें :- Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको चिलगोजा के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |