चांगेरी के फायदे और नुकसान | Changeri ke fayde | health benefits of Changeri in hindi

चांगेरी के पत्ते बहुत ही छोटे होते हैं पर औषधि के दृष्टि से बहुत ही गुणकारी और पौष्टिक होते है।चांगेरी का वर्णन आयुर्वेद-संहिताओं व निघण्टुओं में मिलता है। चरक-संहिता शाक-वर्ग व अम्लस्कन्ध में इसका उल्लेख किया गया है तथा इसका प्रयोग अतिसार (दस्त)व अर्श (बवासीर)आदि के उपचार के लिए किया जाता है।

चांगेरी के फायदे और नुकसान  | Changeri ke fayde | health benefits of Changeri in hindi
Changeri ke fayde

चांगेरी के फायदे और नुकसान  | Changeri ke fayde | health benefits of Changeri in hindi

तिनपतिया (चांगेरी) परिचय :-

चांगेरी के पत्ते बहुत ही छोटे होते हैं पर औषधि के दृष्टि से बहुत ही गुणकारी और पौष्टिक होते है।चांगेरी का वर्णन आयुर्वेद-संहिताओं व निघण्टुओं में मिलता है। चरक-संहिता शाक-वर्ग व अम्लस्कन्ध में  इसका उल्लेख किया गया है तथा इसका प्रयोग अतिसार (दस्त)व अर्श (बवासीर)आदि के उपचार के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त सुश्रुत-संहिता के शाक वर्ग में भी इसका वर्णन किया गया है। इसके पत्ते एसिडिक प्रकृति (अम्लिय) के होते हैं, इसलिए इसे संस्कृत में अम्लपत्रिका कहा जाता है। इस पर पुष्प और फल वर्ष भर मिलते हैं।

चांगेरी क्या है (What is Changeri ?)

इस पर पुष्प और फल वर्ष भर मिलते हैं।इसकी दो प्रजातियां होती हैं– 1. छोटी चांगेरी, 2. बड़ी चांगेरी। परन्तु मुख्यत छोटी चांगेरी का प्रयोग चिकित्सा में किया जाता है।

1.छोटी चांगेरी

चांगेरी अम्लिय और स्वाद में थोड़ा कड़वी और कषाय होने के साथ इसकी तासीर गर्म होती है। यह कफवात, सूजन दूर करने वाली, पित्त बढ़ाने वाली, वेदनास्थापक(एनलजेसिक), लेखन या खरोंचना, शराब का नशा छोड़वाने में मददगार, खाने की रूची बढ़ाये, दीपन (Stomachic), लीवर को सही तरह से काम करवाने में  सहायक और हृदय के लिये स्वास्थ्यवर्द्धक होती (हृद्य, रक्तस्भंक, दाह प्रशमन और ज्वरघ्न) है। यह विटामिन C की अच्छी स्रोत है।

तिनपतिया (चांगेरी) दर्दनिवारक, पाचक, भूख बढ़ाने वाली, लीवर को सेहतमंद बनाने वाली, मूत्रल (डाइयूरेटिक गुण), बुखार कम करने में सहायक, जीवाणुरोधी, (कृमिनिस्सारक), पूयरोधी (एंटीसेप्टिक), (आर्तवजनक) तथा शीतल होती है।

चांगेरी हृदय संबंधी समस्या, रक्तस्राव (ब्लीडिंग), (कष्टार्त्तव, अनार्त्तव) तथा लीवर रोग नाशक होती है।

इसके पञ्चाङ्गसार में अल्सर को ठीक करने की क्षमता होती है।

2.बड़ी चांगेरी (Oxalis acetosella Linn.)-  यह एक छोटा, कोमल, तनारहित, 5-15 सेमी ऊँचा, शाकीय पौधा है। इसके पत्ते तुलनामूलक बड़े, पत्ते का नाल लम्बा तथा तना लाल रंग का होता है। इसके फूल सफेद अथवा गुलाबी रंग के होते हैं। इसके फल अण्डाकार, पंचकोणीय, सीधे, 8 मिमी लम्बे तथा बीज संख्या में प्रत्येक कोश में 2-3 होते हैं। यह शीतल, मूत्रल तथा शीतादरोधी होती है।

चांगेरी का पौधा कैसा होता है ? :-

तिनपतिया का प्रसरणशील छोटा पौधा होता है। इसका कांड तो धरती पर फैला हुआ रहता है किन्तु पत्रवाहक शाखाग्र भाग ऊपर को उठा हुआ रहता है।

तिनपतिया के पत्ते (पत्र) : प्रायः तीन–तीन (क्वचित् चार भी) संयुक्त, गोलाकार होते हैं।

चांगेरी के पुष्प : छोटे छोटे पीले रंग के पुष्पदण्ड पर लगते हैं।

तिनपतिया के फल : लम्बगोल, रोमश होते हैं।

चांगेरी के बीज :– गहरे भूरे रंग के, अनेक, अंडाकार, अनुप्रस्थ धारियों से युक्त होते हैं।

अनेक भाषाओं में चांगेरी के नाम (Changeri Called in Different Languages)

हिंदी :– चांगेरी, तिनपतिया, अम्लोनी, तिपत्ती, चूकातिपाती

संस्कृत नाम :– चांगेरी, अम्लपत्रिका

English :– इण्डियन सोरेल (Indian Sorrel)

Scientific Names :– आक्जेलिस कार्निकुलेटा (Oxalis Corniculata Linn-)

गुजराती (Gujarati) :– खाटी लुणी

मराठी (Marathi) :– आंबटी, भुईसर्पटी

तामिल (Tamil) :– पुलियारै

तेलगु (Telugu) :– पुलिचिन्ता

मलयालम (Malayalam) :– पुलिपारेल

कन्नड़ (Kannada) :– पुल्लमपुरचि

Bengali :– अमरूल (Amarul), उमूलबेट (Umulbet);

Nepali :– चारीअमीलो (Chariamilo);

Panjabi :– खट्ठी बूटी (Khatti buti), अमरुल (Amrul), सुरचि (Surchi), खट्टामीठा (Khattamitha);

 

चांगेरी  के द्रव्यगुण

रस (taste on tongue):- अम्ल, कषाय

गुण (Pharmacological Action): – लघु, रूक्ष

वीर्य (Potency): – उष्ण

विपाक (transformed state after digestion):- अम्ल

चांगेरी के गुण : Properties of Changeri

  • तिनपतिया खट्टी, कषैली तथा गर्म होती है।

  • यह कफ वात नाशक, पित्तवर्द्धक तथा सूजन को नष्ट करने वाली है ।

  • चांगेरी दर्द दूर करने वाली ,लेखन तथा नशा दूर करने वाली है ।

  • तिनपतिया आवाज साफ करने वाला, यकृतोत्तेजक,रुचिकारी, ग्राही, रक्तस्तम्भन ,उत्तेजक और बुखारनाशक है।

  • यह विटामिन–सी का भी अच्छा स्रोत है।

 

चांगेरी का रासायनिक विश्लेषण : Changeri (Indian Sorrel) Chemical Constituents

इसमें पोटाशियम तथा आक्जेलिक एसिड होता है।

चांगेरी से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Changeri benefits and Uses (labh) in Hindi

स्वप्न प्रमेह (स्वप्नदोष) दूर करने में चांगेरी करता है मदद

इसके पंचांग को जलाकर क्षारविधि से क्षार तैयार कर 250 मि.ग्रा. क्षार, 500 मि. ग्रा. हरिद्रा चूर्ण एवं एक ग्राम त्रिफला चूर्ण मिलाकर सेवन कराने से स्वप्नमेह के रोगी को लाभ होता है।

पेट दर्द में चांगेरी के सेवन से लाभ

पत्तों के क्वाथ में घी में सेकी हुई हींग तथा सेंधानमक मिलाकर खिलावें।

आजकल के रफ्तार वाली जिंदगी में असंतुलित खान-पान रोजमर्रा की समस्या बन गई है। इस जीवनशैली का सबसे पहला असर पेट पर पड़ता है। चांगेरी का घरेलू इलाज पेट संबंधी समस्याओं के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। 20-40 मिली चांगेरी के पत्ते के काढ़े में 60 मिग्रा भुनी हुई हींग मिलाकर सुबह शाम पिलाने से पेट दर्द से जल्दी आराम मिलता है।

मसूड़ों के रोग से दिलाये राहत चांगेरी (Benefits of Chaangeri for Gum Diseases in Hindi)

चंगेरी में कषाय रस होता है जो दांतों और मसूड़ों को आराम देता है. इसी गुण के कारण चांगेरी को टूथपेस्ट के घटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. चांगेरी के पत्तों के रस से गरारे करें. इससे मसूड़ों के दर्द और सूजन से आराम मिलता है साथ ही मसूड़ों से होने वाली ब्लीडिंग को रोकने में भी सहायक है.

मुँह की बदबू से दिलाये राहत चांगेरी (Chaangeri Treats Bad Breath in Hindi)-

अगर किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के वजह से या किसी बीमारी के कारण मुँह की बदबू की परेशानी से ग्रस्त हैं तो  चांगेरी के 2-3 पत्तों को चबाने से मुँह की दुर्गंध या बदबू दूर होती है। इसके लिये चांगेरी के पत्तों को सुखाकर, चूर्ण कर, मंजन करने से दांत संबंधी बीमारियों से राहत मिलती है।

टिनीटस में लाभकारी चांगेरी  (Chaangiri Beneficial for Tinnitus in Hindi)

कर्णनाद में कान में झुनझुना या घंटी जैसी आवाज बजती है। ऐसे तकलीफ से राहत पाने में चांगेरी का औषधीय गुण बहुत फायदेमंद होता है। 1-2 बूंद चांगेरी-पञ्चाङ्ग-रस को कान में डालने से कर्णनाद, कान में दर्द, सूजन आदि कान संबंधी बीमारियों में लाभ होता है।

नेत्ररोग से दिलाये राहत चांगेरी (Chaangiri Treats Eye Diseases in Hindi)

आँख संबंधी बीमारियों में बहुत कुछ आता है, जैसे- सामान्य आँख में दर्द, रतौंधी, आँख लाल होना, आँख जलना आदि। इन सब तरह के समस्याओं में चांगेरी से बना घरेलू नुस्ख़ा बहुत काम आता है।  चांगेरी पत्ते के रस को आँखों में लगाने से आँखों में दर्द, जलन आदि आँखों के रोगों से राहत मिलने में आसानी होती है।

सूजन के जलन से दिलाये राहत चांगेरी (Chaangeri Beneficial in Burn Sensation in Hindi)

अगर शरीर के किसी अंग में सूजन के कारण दर्द और जलन अनुभव हो रहा है तो चांगेरी के 10-15 पत्तों को पानी के साथ पीसकर पोटली की तरह बनाकर सूजन पर बांधने से सूजन के कारण उत्पन्न जलन से राहत मिलती है।

शीतपित्त में लाभकारी चांगेरी (Chaangeri Benefits in Urticaria in Hindi)

शरीर पर जो लाल-लाल दाने निकलते हैं वहां चांगेरी-पत्ते के रस में काली मिर्च-चूर्ण तथा घी मिलाकर शरीर पर मालिश करने से शीतपित्त में लाभ होता है।

धतूरे का नशा करे कम चांगेरी (Benefits of Chaangeri to reduce the effect of Dhatura Addicition in Hindi)

20-40 मिली चांगेरी के पत्रों का रस पिलाने से धतूरे का नशा उतरता है।

सिरदर्द में फायदेमंद चांगेरी (Benefit of Chaangiri to Get rid of Headache in Hindi)

अगर आपको काम के तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी के वजह से सिरदर्द की शिकायत रहती है तो चांगेरी का घरेलू उपाय बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। चांगेरी के रस में समभाग प्याज का रस मिलाकर सिर पर लेप करने से शरीर में पित्त के बढ़ जाने के कारण सिरदर्द होने पर उससे आराम मिलता है।

व्रणशोथ या अल्सर के सूजन में फायदेमंद चांगेरी (Chaangeri Heals Ulcer in Hindi)

अगर किसी कारणवश अल्सर या घाव हो गया है और सूखने का नाम नहीं ले रहा तो चांगेरी का इस्तेमाल ज़रूर करें। घाव के दर्द से आराम दिलाने में चांगेरी बहुत फायदेमंद (changeri ke fayde) है। चांगेरी-पञ्चाङ्ग को पीसकर व्रणशोथ पर लगाने से दर्द और जलन दोनों कम होता है।

पागलपन या उन्माद में फायदेमंद चांगेरी (Chaangeri Beneficial in Insanity in Hindi)

मस्तिष्क के इस विकार को बेहतर अवस्था में लाने में चांगेरी बहुत मदद करती है। चांगेरी-स्वरस, कांजी तथा गुड़ सबको समान मात्रा में लेकर अच्छी तरह मथकर तीन दिन तक पिलाने से उन्माद में लाभ होता है।

रक्तस्राव या ब्लीडिंग में लाभकारी चांगेरी (Benefits of Chaangeri in Bleeding in Hindi)

अगर किसी चोट या घाव के  कारण ब्लीडिंग हो रही है या मासिक धर्म के कारण अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही है तो चांगेरी का प्रयोग फायदेमंद (changeri ke fayde) साबित हो सकता है। 5-10 मिली पञ्चाङ्ग-रस को दिन में दो बार सेवन करने से रक्तस्राव कम होता है।

मूत्राशय में सूजन से दिलाये राहत चांगेरी (Chaangeri Beneficial in Bladder Inflammation in Hindi)

मूत्राशय का सूजन होने पर चांगेरी का सेवन इस तरह से करने पर जल्दी आराम मिलता है। चांगेरी के पत्तों को शक्कर के साथ पीसकर शर्बत बनाकर पीने से मूत्राशय शोथ (मूत्राशय में सूजन), तृष्णा (प्यास) तथा ज्वर या बुखार से जल्दी आराम मिलता है।

चर्मकील या कॉर्न में करे चांगेरी का प्रयोग (Chaangeri Benefits in Corn in Hindi)

कॉर्न यानि पैर के तलवे में गांठ जैसा बन जाता है। इसको ठीक करने में चांगेरी का इस तरह से प्रयोग करने पर जल्दी आराम मिलता है। 5-10 मिली चांगेरी के ताजे रस में समान मात्रा में पलाण्डु रस मिलाकर लगाने से चर्मकील जल्दी ठीक होती है।

रोमकूप में सूजन से दिलाये राहत चांगेरी (Chaangeri Beneficial in Pore Inflammation in Hindi)

रोमकूप में सूजन होने पर एक तो दर्द होता है ऊपर से रोमकूप बंद हो जाने से घाव भी हो सकता है। इससे राहत पाने के लिए चांगेरी पत्तों को पीसकर रोमकूपशोथ पर लगाने से रोमकूपशोथ कम हो जाता है।

चर्म रोग में फायदेमंद चांगेरी (Benefits of Chaangeri in Skin Diseases in Hindi)

आजकल के तरह-तरह के नए-नए कॉज़्मेटिक प्रोडक्ट के दुनिया में त्वचा रोग होने का खतरा भी दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। चांगेरी के द्वारा बनाये गए घरेलू उपाय चर्म या त्वचा रोगों से निजात दिलाने में मदद करते हैं। पञ्चाङ्ग रस में काली मरिच चूर्ण तथा घी मिलाकर सेवन करने से पित्त के कारण त्वचा संबंधी जो रोग होता है उसमें लाभ होता है।

अग्निमांद्य (अपच) से दिलाये राहत चांगेरी (Chaangeri to Treat Dyspepsia in Hindi)

अग्निमांद्य यानि कमजोर पाचन शक्ति और उल्टी होने जैसी इच्छा में चांगेरी को देने से जल्दी आराम मिलता है। चांगेरी पत्ते में समान मात्रा में पुदीना-पत्ता मिलाकर पीसकर थोड़ा काली मिर्च व नमक मिलाकर खाने से जल्दी हजम होता है।

मंदाग्नि या बदहजमी में फायदेमंद चांगेरी (Chaangeri for Indigestion in Hindi)

अगर किसी बीमारी के कारण या खान-पान की गड़बड़ी के कारण बार-बार बदहजमी की समस्या से जुझ रहे हैं तो चांगेरी का घरेलू इलाज बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। चांगेरी के 8-10 ताजे पत्तों की चटनी बनाकर देने से पाचन शक्ति बढ़ती है।

अर्श या पाइल्स मे़ं फायदेमंद चांगेरी (Chaangeri to Treat Piles in Hindi)

जो लोग ज्यादा मसालेदार और गरिष्ठ भोजन खाना पसंद करते हैं उनको कब्ज और बवासीर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चंगेरी में अग्निवर्धक गुण होते हैं अर्थात यह पाचक अग्नि को बढ़ाता है जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त होता है. आइये जानते हैं बवासीर के इलाज में चंगेरी का इस्तेमाल कैसे करें :

निशोथ, दंती, पलाश, चांगेरी तथा चित्रक के पत्तों के शाक को घी या तेल में भूनकर दही मिलाकर सेवन करने से शुष्कार्श में लाभ होता है।

5-10 मिली चांगेरी-पञ्चाङ्ग-स्वरस का सेवन करने से अर्श में लाभ होता है।

चांगेरी-पञ्चाङ्ग को घी में सेंक कर शाक बनाकर दही के साथ सेवन से अर्श में लाभ होता है।

तिनपतिया, निशोथ, दन्ती, पलाश, चित्रक इन सबकी ताजी पत्तियों को समान मात्रा में लेकर घी में भूनकर, इस शाक में दही मिलाकर खाने से शुष्कार्श में लाभ होता है।

हैजा में चांगेरी के फायदे (Benefits of Chaangeri to Get Relief from Cholera in Hindi)

 इस बीमारी से शरीर में जल की मात्रा कम होने का खतरा होता है। चांगेरी का इस तरह से सेवन करने पर दस्त का होना रूक जाता है। 5-10 मिली चांगेरी रस में 500 मिग्रा काली मिर्च चूर्ण मिलाकर खिलाने से विसूचिका या हैजा में लाभ होता है।

ग्रहणी या इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम में चांगेरी के फायदे (Benefits of Chaangeri for Irritable bowel syndrome in Hindi)

अगर किसी बीमारी के कारण ग्रहणी की शिकायत बार-बार हो रही है तो चांगेरी (changeri ka podha) का औषधीय गुण इससे राहत दिलाने में मदद करती है। चौथाई भाग पिप्पल्यादि-गण की औषधियों के पेस्ट, चार गुना दही तथा चांगेरी रस और एक भाग घी से अच्छी तरह से पकाने के बाद मात्रानुसार सेवन करना चाहिए।

चांगेरी के उपयोगी भाग : Beneficial Part of Changeri (Indian Sorrel) in Hindi

पंचांग (जड़, छाल, पत्ती, फूल ओर फल)

चांगेरी के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Changeri?)

काढ़ा – 20-30 मिली

रस – 5-10 मिली

घी (चांगेरी घृत) – 5-10 मिली

चांगेरी घृत बनाने की विधि – चांगेरी घृत के निर्माण प्रकार शास्त्रों में अनेक वर्णित हैं यहाँ पर एक विधि का वर्णन किया जाता है –

सोंठ, पीपलामूल, चव्य, चित्रक, पिप्पली, गोखरू, धनियां, बेलगिरी, पाठा और अजवायन सब समभाग लेकर इनका कल्क बना लें। इस कल्क से चार गुना गाय का घी, घी से चार गुना चांगेरी स्वरस तथा स्वरस के बराबर दही एवं उतना ही पानी मिलाकर घृत सिद्ध कर लें।

ऐसे रोगी जो जीर्ण अतिसार से पीड़ित होते है। या संग्रहणी से ग्रस्त होते हैं उनके गुदभ्रंश (कांच निकलना) प्राय:हो जाया करता है उन रोगियों के लिये यह श्रेप्ट औषधि है। मात्रा-5-10 ग्राम।

गुदभ्रंश में चांगेरी घृत के साथ त्रिफला चूर्ण एवं लौह भस्म देने से अधिक लाभ होता है।

इसके सेवन से अरुचि, आध्मान, अर्श, प्रवाहिका, मूत्रकृच्छ्र आदि रोगों का भी शमन होता है।

गुदभ्रंश में पंचांग का घनसत्व बना शुद्ध स्वर्ण गौरिक मिलाकर दें।

चांगेरी के सेवन का तरीका (How to Use Changeri?)

बीमारी के लिए चांगेरी के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए चांगेरी का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

चांगेरी के नुकसान :- Side Effects of Changeri

तिनपतिया (चांगेरी ) के कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं हैं फिर भी इसे आजमाने से पहले अपने चिकित्सक या सम्बंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय अवश्य ले ।

चांगेरी कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Changeri Found or Grown?)

तिनपतिया (Changeri) श्रीलंका एवं भारत में प्राय: सर्वत्र पाई जाती है तथा हिमालय में 6,000 फुट की ऊंचाई तक यह पाई जाती है । इस पर फूल और फल लगभग वर्ष भर मिलते हैं।