भृंगराज के फायदे और नुकसान | Bhringraj ke fayde | health benefits of Bhringraj in hindi

आयुर्वेद में भृंगराज (bhringraj in Hindi) को केसराज के नाम से भी जाना जाता है।भांगरे के पौधे बरसात के दिनों में सब जगह पैदा होते हैं और तर जमीनों में ये बारहों मास रहते हैं।आयुर्वेदिक मत से भांगरे का पौधा कड़वा, गरम, धातु परिवर्तक, कृमिनाशक और विषनाशक होता है।

भृंगराज के फायदे और नुकसान | Bhringraj ke fayde | health benefits of Bhringraj in hindi
Bhringraj ke fayde

भृंगराज के फायदे और नुकसान | Bhringraj ke fayde | health benefits of Bhringraj in hindi

भृंगराज परिचय :- आयुर्वेद में भृंगराज (bhringraj in Hindi) को केसराज के नाम से भी जाना जाता है। इसे वर्षों से झड़ते बालों को रोकने, बालों को काला करने एवं त्वचा संबंधी बीमारी के उपचार के रूप प्रयोग किया जा रहा है। वास्तव में भृंगराज (एक्लीप्टा अल्बा) एक जड़ी बूटी है, जिसका काम शरीर को स्वस्थ बनाए रखना है।

भृंगराज क्या है (What is Bhringraj?)

भांगरे के पौधे बरसात के दिनों में सब जगह पैदा होते हैं और तर जमीनों में ये बारहों मास रहते हैं। इसके पौधे आधे से लेकर दो फीट तक लम्बे होते हैं, कुछ पौधे तो सीधे खड़े रहते हैं और बाकी पौधे जमीन पर फैले हुये रहते हैं । इसको शाखाएं हरी, चमकीली और कुछ काले रंग की छाया लिये हुये होती हैं।

शाखाओं के ऊपर सफेद रङ्ग के सख्त रुएँ रहते हैं । पत्ते 1 से लेकर 3 इंच तक लम्बे और आधे से लेकर 1 इंच तक चौड़े होते में हैं। इनको मसलने से इनसे कुछ कालापन लिये हुये हरे रंग का रस निकलता है जो थोड़े ही समय में काला पड़ जाता है । इसके फूल सफेद और फल काले होते हैं।

अनेक भाषाओं में भृंगराज के नाम (Bhringraj Called in Different Languages)

  • हिंदी :– भृंगराज , भांगरा, भंगरा।

  • संस्कृत नाम :– भृगराज, भृङ्ग, भेकराज, भृगरज, कुंतलवर्धन, केशरंजन, पितृप्रिय, रंगक, अंगारक, माकंव, इत्यादि ।

  • English :– false daisy

  • Scientific Names :– Eclipta alba

  • मराठी माका, बांगरा, भृगराज ।

  • पंजाबी किशोरी, केशराज, केसटी, भीमराज ।

  • गुजराती भांगरो, कालो भांगरो, कालूगंथी ।

  • संयाल लाल केसरी ।

  • सिन्ध टिक ।

  • तामील केकेशी, केवी शिलाइ, कृष्णलंगानि ।

  • तेलगू गलागरा, गुंट कलगरा।

  • उर्दू भांगरा।

भृंगराज (भांगरा) के प्रकार :

आयुर्वेदिक निघण्टुओं में भांगरे की सफेद, पीली और काली ये तीन जातियां मानी हैं। सफेद जाति को. भृंगराज, पीली जाति को पीत भृंगराज और काली जाति को नील भृंगराज कहा गया है।

लोगों का ख्याल है कि काली जाति वाले भांगरे धातुओं से सोना बनाने के काम में आते है और यह जाति बड़ी कठिनता से भाग्यशाली मनुष्यों को ही मिलती है, मगर आधुनिक वनस्पति शास्त्रियों का खयाल हैं कि भांगरे की काली जाति होती ही नहीं सिर्फ सफेद फूल वाले भांगरे की सफेद पंखड़िया खिल जाने के बाद उसका नीला या काले रंग का जो हिस्सा रह जाता है उसी को लोग काले रङ्ग का भांगरा समझते हैं। इसलिये औषधि शास्त्र में अभी तक जहां भांगरे का वर्णन आता हैं वहां सफेद जाति का ही भांगरा काम में लिया जाता है।

भृंगराज  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- कड़वा

  • गुण (Pharmacological Action): - गुरु/भारी,

  • वीर्य (Potency): - गरम

  • विपाक (transformed state after digestion):- मधुर

भृंगराज के गुण : Properties of Bhringraj

  • आयुर्वेदिक मत से भांगरे का पौधा कड़वा, गरम, धातु परिवर्तक, कृमिनाशक और विषनाशक होता है।

  • यह बालों के सौन्दर्य को बढ़ाने बाला होता है ।

  • यह नेत्रों की ज्योति को तेज करने वाला और दांतों को मजदूत करने वाला है ।

  • भृंगराज सूजन, हर्निया (आंत्रवृद्धि), नेत्र रोग, कफ, वात, खांसी, दमा आदी रोगों को दूर करता है भृंगराज

  • यह श्वेत कुष्ठ, पाण्डुरोग, हृदय रोग, चर्मरोग, खुजली, रतौंधी, उपदंश और विष को नष्ट करने वाला होता है।

  • गर्भपात और गर्भस्राव को रोकने के लिये तया प्रसूति के पश्चात् गर्भाशय में होने वाली वेदना को रोकने के लिये इसका उपयोग किया जाता है।

  • भांगरे में अंग्रेजी औषधि टेरेक्सेकम की तरह पित्त को शुद्ध करने, बालों को बढ़ाने और दीर्घायु करने के – गुण प्रधान रूप से रहते हैं।

  • इसके अंदर अनेक प्रकार के एंटी-ऑक्सिडेंट्स जैसे- फ्लैवानॉयड और एल्कलॉइड होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने का काम करते हैं।

  • यह विभिन्न प्रकार के हानिकारक पदार्थों से लीवर की रक्षा करने का काम करता है और लीवर को स्वस्थ बनाए रखता है। भृंगराज (bhringraj uses) का एंटी-माइक्रोबियल गुण लीवर को हेपेटाइटिस सी जैसे वायरल संक्रमण से भी बचाता है।

  • इतना ही नहीं यह शरीर में होने वाले सूजन रोकने में असरदायक होता है। इसके अंदर मौजूद बालों के बढ़ने में सहायक पोषक तत्व, बालों की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ बालों की वृद्धि करता है।

यूनानी मतानुसार भृंगराज (भांगरा) के औषधीय गुण :

  • यूनानी मत से इसका पौधा कड़वा और तीखा होता है।

  • यह बालों के रंग को बढ़ाता हैं, नेत्रों की ज्योति को तेज करता हैं ।

  • पौष्टिक, कफ निस्सारक, अग्निवर्धक और ज्वरनाशक होता है ।

  • तिल्ली के रोग, दन्तशूल, मस्तकशूल, ज्वर, यकृतशूल, आधा शीशी और मुखरोग में यह बहुत उपयोगी होता है।

  • इसके सेवन से सिर के चक्कर दूर हो जाते हैं।

भृंगराज से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Bhringraj benefits and Uses (labh) in Hindi

फैटी लीवर और पीलिया आदि में भी फायदेमंद (use of bhringraj in fatty liver and jaundice) :

इसके अंदर एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लैमटेरी गुण होता है। जो फैटी लीवर, पीलिया आदि जैसी बीमारी में फायदा पहुंचाता है।

सेवन विधि: आप एक दिन में दो बार भृंगराज (bhringraj benefits) की खुराक ले सकते हैं। आप हल्का खाना खाने के बाद भृंगराज के पाउडर को पानी के साथ ले सकते है। अच्छे परिणाम के लिए इसका सेवन कम से कम 1-2 महीने तक करें।

इम्युनिटी क्षमता बढ़ाने में मदद(use of bhringraj for immunity power):

यह शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूत बनाने वाली कोशिकाओं (सफेद रक्त कोशिकाओं) के उत्पादन में सहायता करता है। यह हमारे शरीर को संक्रमण से बचाने वाली सफेद रक्त कोशिकाएं (डब्लूबीसी) को बढ़ाने का काम करता है।

कफ एवं वात विकार में फायदेमंद (use of bhringraj in cough and vata disorder) :

भृंगराज के अंदर पोषक तत्व होता है जो कफ एवं वात विकार को कम करने का काम करता है।

लीवर एवं किडनी संबंधी विकार में मदद (use of bhringraj in liver and kidney disease): भृंगराज (bhringraj ke fayde) को फाल्स डेज़ी भी कहा जाता है। यह लीवर के साथ-साथ किडनी के लिए भी फायदेमंद होता है। इसके जड़ का प्रयोग शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को बाहर निकालने और शारीरिक कार्यप्रणाली को गतिशील रखने के लिए किया जाता है।

त्वचा के संक्रमण का इलाज(use of bhringraj in skin infection) :

भृंगराज एक जड़ी बूटी है जिसमें एंटी-इंफ्लामेंटरी होता है। यह त्वचा को संक्रमण से सुरक्षित रखता है।

सेवन विधिः त्वचा के कटने, छिलने, चोट लगने सहित अन्य विकार की स्थिति में भृंगराज (bhringraj paste) की पत्तियों का पेस्ट बनाकर लगाएं या इस पेस्ट को किसी तेल में मिलाकर घाव अथवा चोट वाले स्थान पर लगाएं।

अपच, कब्ज एवं पेट संबंधी अन्य परेशानी में फायदेमंद(use of bhringraj in constipation, digestion and stomach problem): इसके अंदर रहने वाला एंटी-इंफ्लमैटरी तत्व लीवर को स्वस्थ रखकर, पेट की कार्यप्रणाली को सुगम बनाने का काम करता है, जिससे आंत सुचारू रूप से कार्य करता है और अपच, कब्ज और पेट की अन्य परेशानियों से राहत मिलती है। यह शरीर में होने वाली सूजन को रोकने में भी फायदेमंद होता है।

भूख की कमी, एसिडिटी में असरदायक आयुर्वेद के अनुसार भृंगराज पाचन, कब्ज और भूख की कमी जैसी परेशानियों के इलाज में भी उपयोगी होता है।

सेवन विधिः इसके लिए आप 15-20 मिलीलीटर भृंगराजासव (bhringraj uses in Hindi) लें और इतना ही पानी के साथ, दोपहर और रात को खाने के बाद लें।

अग्नि से जलने पर भृंगराज के फायदे

अग्नि से जले हुये व्रण के ऊपर भांगरा, मरवा और मेंहदी के पत्तों को पीसकर लगाने से जलन शान्त हो जाती है और नवीन आने वाली चमड़ी शरीर के रङ्ग की हो आती है।

 बालों को काला करने में भृंगराज के लाभ – bhringraj benefits for hair in hindi

भांगरे के रस में हीरा कसी को मिलाकर लेप करने से बाल काले हो जाते हैं।

उपदंश के व्रण में भृंगराज के फायदे

भांगरे के रस से अथवा भांगरे और जूही के पत्तों के रस को मिलाकर उस रस से उपदंश के व्रण को धोने से बड़ा लाभ होता है।

भांगरा और बिच्छू का विष

योगरत्नाकर के कर्ता लिखते हैं कि बिच्छू के डंक पर इसके पत्तों को कुचलकर लेप करने से तथा इसके रस को नाक में टपकाने से विच्छू का विष उतर जाता है। इसी का समर्थन करते हई डॉक्टर नॉडकरनी लिखते हैं कि भांगरे के पत्ते बिच्छू के विष को दूर करने के लिये एक चमत्कारिक इलाज है। इसका उपयोग में लेने का तरीका यह है कि इसके पत्तों को पीसकर बिच्छ के डंक की वजह से जितने भाग में सूजन आ गयी हो अथवा जहां तक वेदना फैल गई हों वहाँ तक खूब अच्छी तरह से मसलना चाहिये । इस प्रकार मसलने से आस-पास के सब भाग में से वेदना निकल कर डंक पर केन्द्रीभूत हो जाती है। उसके बाद डंक पर इस औषधि को खूब अच्छी तरह मसलने से और इसकी लुग्दी को डंक पर बांध देने से भी वेदना निकल जाती है।

नवजात शिशु का जुकाम में भृंगराज के लाभ

तत्काल पैदा हुए नवजात शिशु को अगर कफ का जोर हो जाय और उसके गले में कफ घड़ – घड़ बोलने लगे तो भांगरे के स्वरस की दो बूंद निकालकर उसमें 8 बूंद शहद मिलाकर उस मिश्रण को उँगली के द्वारा बच्चों के गले में पहुँचा देने पर सब कफ निकल पड़ता है। और बच्चों की चेतना जागृत हो जाती है।

आधा शीशी में इसके लाभ

भांगरे का रस और बकरी का दूध समान भाग लेकर उसको गरम करके नाक में टपकाने से और भांगरे के रस में काली मिर्च मिलाकर सिर पर लेप करने से आधा शीशी मिट जाती है।

कामला(पीलिया) के उपचार में इसके लाभ

भांगरे के रस में काली मिर्च मिलाकर सबेरे दही के साथ लेने से 7 दिन में कामला आराम हो जाता है।

धनुर्वात में भृंगराज के फायदे

भांगरे का रस 12 ग्राम , तूंबी का रस 3 ग्राम , निगुडी का रस 12 ग्राम और अगस्त्य के पत्तों का रस 36 ग्राम इन सब रसों को मिलाकर इन सब रसों से चौगुना नारियल का स्वरस मिलाकर उस सब रस में थोड़ा सा चावल डालकर खीर बना लेना चाहिये। इस खीर में थोड़ा सा गुड़ मिलाकर प्रतिदिन दोनों टाइम खाने से धनुर्वात में लाभ होता है।

पारे के विष में भृंगराज के फायदे

भांगरे का रस, अगस्त्य का रस और सोरा । मट्ठे में मिलाकर उस मट्ठे को 48 ग्राम को मात्रा में खिलाने से शरीर के अन्दर फैला हा पारे का जहर मूत्र मार्ग से निकल जाता है।

बच्चों के डिब्बा रोग में इसके लाभ

भांगरे के रस में घी मिलाकर 3 दिन तक देने से बच्चों का डिब्बा रोग आराम होता है।

अग्निदग्ध में भृंगराज के लाभ

अग्नि से जले हुए स्थान पर दिन में दो बार भांगरे के पत्तों और तुलसी के पत्तों का रस निकाल कर लगाने से जलन शान्त हो जाती है और शरीर पर किसी प्रकार का दाग नहीं पड़ता।

मोटापा (मेद रोग) में भांगरे के लाभ

प्रतिदिन रात को सोते समय भांगरे का स्वरस शरीर पर मसल कर रमा देना चाहिये । इस प्रकार 6 महीने तक लगातार करते रहने से शरीर की बढ़ी हुई चर्बी और उस चर्बी की वजह से जगह – जगह होने वाली गठाने दूर हो जाती हैं।

पेट के कृमि में भृंगराज के लाभ

इसके पत्तों का रस गुदा में 3-4 बार लगाने से पेट के कृमि नष्ट हो जाते हैं।

विसर्परोग में भृंगराज के लाभ

भांगरे की जड़ और हल्दी को लगातार लेप करने से विसर्प रोग मिटता है।

कुष्ठ रोग में भृंगराज के फायदे

भांगरे के स्वरस और गुञ्जा की लुग्दी से सिद्ध किये हुए तेल की मालिश करने से कंडू, कुष्ठ और मस्तक पीड़ा मिटती है।

गज चर्म में भृंगराज के लाभ

इसके ताजे पौधे की लुग्दी को तिल के तेल में औटाकर उस तेल को गज चर्म के ऊपर मालिश करने से लाभ होता है।

भृंगराज से निर्मित आयुर्वेदिक औषधियां :

1- भृगराज तेल

भृगराज तेल के घटक द्रव्य और बनाने की विधि – process of making bhringraj oil

भांगरे का रस 8 लीटर , त्रिफले का काढ़ा 4 लीटर , तिल का तेल 4 लीटर सेर, गाय का दूध 4 लीटर, कमल की नाल, कमल की जड़, मजीठ, सुरमा, नील, कमल गट्टा, नागरमोथा, पुनर्नवा की जड़, हरड़ बहेड़ा, आंवला, भांगरे की जड़, चिरमी के बीज, नाग केशर, आम की गुठली, अनन्त मूल, मुलैठी, कटसरैया, देवदारु, पद्माक, लाल चन्दन, तमालपत्र, मेंहदी के बीज, बरियारा, शतावरी, बड़ के अंकुर, गोलोचन, नीलाथूथा ,इन्द्रायण के बीज, केवड़ा, जटामांसी, कमल के फूल, जासूद के फूल, बहेड़े के बीज, रासना की जड़, गेरू, दारुहलदी, रसोत, असगन्ध, बिदारी कन्द, डोड़ी, लाख, केले का कन्द, अगर, लाद और हाथी दांत की राख । इन सब चीजों को 48 – 48 ग्राम लेकर पानी के साथ पीसकर लुग्दी बनाकर एक लोहे की कड़ाही में रख दें और उसी कड़ाही में भांगरे का रस, त्रिफले का काढ़ा, गाय का दूध और तिल्ली का तेल भी भर दें और नीचे हलकी आंच लगा दें। जब औटते 2 सब चीजें जलकर तेल मात्र शेष रह जाय तब उतार कर उसको छान लें।

 भृगराज तेल के फायदे – bhringraj oil benefits

  • इस तेल को प्रतिदिन सिर में लगाने से असमय में सफेद हुए बाल फिर से काले हो जाते हैं ।

  • बालों की जड़ें मजबूत होकर बालों का गिरना बन्द होता है,

  • बालों का रंग भंवरे के समान काला और चमकदार हो जाता है।

  • बाल सघन हो जाते हैं।

  • मस्तिष्क और आंखों को गरमी दूर हो जाती है।

  • यहां तक कि सिर की गंज(गंजापन) भी समय आने पर मिट जाती है और नये बाल पैदा होने लगते हैं ।

2- रस मंडूर :

 रस मंडूर के घटक द्रव्य और बनाने की विधि

शुद्ध गंधक 96 ग्राम और शुद्ध पारा 24 ग्राम लेकर खरल में डालकर कज्जली कर लें। फिर एक लोहे की कड़ाही में उसको डालकर उसमें 192 ग्राम हरड़ का चूर्ण, 96 ग्राम मंडूर भस्म और 1536 ग्राम भांगरे का स्वरस डालकर लोहे के दस्ते में घोटना चाहिये । घोटते – घोटते जब रस का भाग सूख जाय तब उसे निकालकर कांच की बरनी में भर लेना चाहिये ।

 रस मंडूर की सेवन विधि और फायदे

इस औषधि को डेढ़ ग्राम से 2 ग्राम की मात्रा में प्रति दिन सबेरे शाम 12 ग्राम शहद और 6 ग्राम घी के साथ मिलाकर चाटने से और पथ्य में सिर्फ दूध और भात लेने से पित्त की शुद्धि होकर जठराग्नि प्रदीप्त हो जाती है और भोजन के पश्चात् होने वाला उदर शूल, अम्लपित्त, खट्टी डकार , छाती की जलन, कामला तथा यकृत और तिल्ली की वृद्धि नष्ट हो जाती है ।

3- भृङ्गराज रसायन

ताजे भांगरे को पीसकर उसका निकाला हुआ स्वरस प्रतिदिन प्रातः काल 12 ग्राम की मात्रा में पीने से और पथ्य में सिर्फ दूध पर ही रहने से 1 महीने में शरीर निरोग हो जाता है । बल और कान्ति बढ़ती है तथा मनुष्य दीर्घायु होता है ।

4-भृंगराज के पाउडर का इस्तेमाल (bhringraj powder benefits):

½ to 1 चम्मच भृंगराज पाउडर लें। इसमें नारियल का तेल मिला लें और बालों की जड़ों में लगाकर मसाज करें। इसके बाद बालों को एक या दो घंटों के छोड़ने के बाद किसी हर्बल शैंपू से धो लें। ऐसा सप्ताह में तीन बार करें।

5-भृंगराज की पेस्ट का इस्तेमाल(use of bhringraj paste):

भृंगराज (bhringraj paste) की ताजी पत्तियों का ½ से 1 चम्मच पेस्ट बना लें। इसे बालों की जड़ों पर लगाकर 5 से 8 घंटों के लिए छोड़ दें। इसके बाद पानी से धो लें। गंजेपन से बचाव के लिए इसे सप्ताह में दो से तीन बार प्रयोग करें।

 

भृंगराज की उपयोगिता (bhingraj benefits in Hindi): शरीर की बाहरी बीमारी के लिए आप इसे तेल, पाउडर या पेस्ट के साथ मिला उपयोग में ला सकते हैं और शरीर के अंदर की परेशानी के लिए आप जूस, पाउडर (bhringraj powder benefits) का सेवन कर सकते हैं। इसी तरह कैप्सूल गुनगुने पानी के साथ खाएं।

भृंगराज को नारियल के तेल में मिलाकर लगाने का तरीका (how to use bhringraj oil with coconut oil):

भृंगराज की ताजी पत्तियां लें। इन पत्तियों का पेस्ट बनाकर इसमें नारियल (bhringraj oil) या कोई दूसरा तेल भी मिला सकते हैं।

आप एक मुट्ठी भृंगराज की पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसमें नारियल तेल मिला सकते हैं। आपको इसे पांच मिनट तक मिलाना है और फिर बालों पर लगाना है। आप भृंगराज की पत्तियों की जगह इसके पाउडर (bhringraj power benefits) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

भृंगराज के सेवन का तरीका (How to Use Bhringraj?)

भृंगराज का उपयोग तीन तरीके से किया जा सकता है। डॉक्टर की परामर्श के अनुसार आप इसकी पत्तियों का पेस्ट बनाकर और उसमें तेल मिलाकर प्रयोग में ला सकते हैं।

आप इसके पाउडर में तेल (bhringraj oil) मिलाकर भी प्रयोग में ला सकते हैं या फिर बाजार में मिलने वाली भृंगराज (bhringraj uses) के कैप्सूल को खाकर समस्याओं से राहत पा सकते हैं, लेकिन सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

भृंगराज (bhringraj in Hindi) शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूत करने वाला एक उपयोगी जड़ी बूटी है जो शरीर को विभिन्न संक्रमणों से सुरक्षित रखता है। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भृंगराज का सेवन लगातार 3 से 4 माह तक किया जाए तो शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति मजबूत होती है। आप 2 से 3 ग्राम भृंगराज पाउडर को शहद के साथ मिलाकर हल्का खाना खाने के बाद, दिन में दो बार ले सकते हैं।

भृंगराज के नुकसान :Side Effects of Bhringraj

  • शोध के अनुसार अब तक भृंगराज से होने वाले दुष्प्रभाव (bhringraj side effects) की कोई प्रामाणिक तथ्य का पता नहीं लगा है। इसलिए आप इन बीमारियों में भृंगराज का सेवन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

  • अधिक मात्रा में सेवन करने से आपको पेट से संबंधित परेशानी हो सकती है। इसी तरह गर्भावस्था और स्तनपान की अवस्था में डॉक्टर के परामर्श के बाद ही भृंगराज (bhringraj ke nuksan) का सेवन नहीं करें।

  • अगर आप मधुमेह से पीड़ित हैं और आपके शुगर का लेवल बढ़ा हुआ है तो भृंगराजासव के सेवन से बचना चाहिए। अगर भृंगराज के सेवन के दौरान आपको किसी तरह की समस्या (bhringraj ke nuksan) होती है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

भृंगराज कैसे प्राप्त करें ? ( How to get Bhringraj)

इस औषधी को प्राप्त करने के लिए आप इसी (भृंगराज) नाम से सभी आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां से प्राप्त कर सकते हैं ।

भृंगराज कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Bhringraj Found or Grown?)

भांगरे के पौधे बरसात के दिनों में सब जगह पैदा होते हैं और तर जमीनों में ये बारहों मास रहते हैं।

ध्यान दें :- Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको भृंगराज के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |