आंवला  के फायदे और नुकसान | Amla ke fayde | health benefits of Amla in hindi

आंवला के प्रयोग से अनगिनत फायदे (amla ke fayde) होते हैं। आंवला खून को साफ करता है, दस्त, मधुमेह, जलन की परेशानी में लाभ पहुंचाता है। इसके साथ ही यह जॉन्डिस, हाइपर-एसिडिटी, एनीमिया, रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहने की समस्या), वात-पित्त के साथ-साथ बवासीर या हेमोराइड में भी फायदेमंद होता है। यह मल त्याग करने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। यह सांसों की बीमारी, खांसी और कफ संबंधी रोगों से राहत दिलाने में सहायता करता है। अमला आंखों की रोशनी को भी बेहतर करता है। अम्लीय गुण होने के कारण यह गठिया में भी लाभ पहुंचाता है।

आंवला  के फायदे और नुकसान | Amla ke fayde | health benefits of Amla in hindi
Amla ke fayde

आंवला  के फायदे और नुकसान | Amla ke fayde | health benefits of Amla in hindi

आमला परिचय :- आयुर्वेद के अनुसार हरीतकी (हड़) और आँवला दो सर्वोत्कृष्ट औषधियाँ हैं। इन दोनों में आँवले का महत्व अधिक है। चरक के मत से शारीरिक अवनति को रोकनेवाले अवस्थास्थापक द्रव्यों में आँवला सबसे प्रधान है। प्राचीन ग्रंथकारों ने इसको शिवा (कल्याणकारी), वयस्था (अवस्था को बनाए रखनेवाला) तथा धात्री (माता के समान रक्षा करनेवाला) कहा है।

आंवला क्या है (What is Amla?)

आमला को आयुर्वेद में अमृतफल या धात्रीफल कहा गया है। वैदिक काल से ही आंवला (phyllanthus emblica) का प्रयोग औषधि के रूप में किया जा रहा है।

पेड़-पौधे से जो औषधि बनती है उसको काष्ठौषधि कहते हैं और धातु-खनिज से जो औषधि बनती है उनको रसौषधि कहते हैं। इन दोनों तरह की औषधि में आंवला का इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि आंवला को रसायन द्रव्यों में सबसे अच्छा माना जाता है यानि कहने का मतलब ये है कि जब बाल बेजान और रूखे-सूखे हो जाते हैं तब आंवला का प्रयोग करने पर बालों में एक नई जान आ जाती है। आंवला का पेस्ट लगाने पर रूखे बाल काले, घने और चमकदार नजर आने लगाते हैं।

चरक संहिता में आयु बढ़ाने, बुखार कम करने, खांसी ठीक करने और कुष्ठ रोग का नाश करने वाली औषधि के लिए अमला का उल्लेख मिलता है। इसी तरह सुश्रुत संहिता में आंवला के औषधीय गुणों के बारे में बताया गया है. इसे अधोभागहर संशमन औषधि बताया गया है, इसका मतलब है कि आंवला वह औषधि है, जो शरीर के दोष को मल के द्वारा बाहर निकालने में मदद करता है। पाचन संबंधित रोगों और पीलिया के लिए आंवला (Indian gooseberry) का उपयोग किया जाता है। इसे कई जगहों पर अमला नाम से भी जाना जाता है।

पूरी तरह वृद्ध हो चुके महर्षि च्यवन ने पहले पहल इस खट्टे-मीठे आँवले की चटनी बनाकर खाना आरंभ किया। इससे उनके जीवन में अभूतपूर्व शक्ति का संचार होने लगा। धीरे-धीरे उन्होंने ही इस चटनी में कुछ अन्य जड़ी-बूटियाँ, फलों, पत्तों, गुठलियों आदि को जोड़कर बेहद उपयोगी बना दिया और इसे खाना शुरू कर दिया। इसकी बदौलत वह शक्ति पाते गए। उनके शरीर के सारे अंग पहले से अधिक कार्यशील होते गए। वह पूर्ण स्वस्थ रहकर दीर्घजीवी बने।

उन्हीं के नाम पर इस अवलेह का नाम च्यवन प्राशरखा गया, जिसका खूब प्रयोग होने लगा। आज तो बड़ी-बड़ी आयुर्वेदिक कम्पनियाँ जैसे डाबर, झंडू, वैद्यनाथ सभी इसे बनाने-बेचने में लगे हैं। लोग इसका भरपूर लाभ उठाते हैं।

यह दुर्बलता दूर करने की अचूक दवा है। औषधीय गुणों के कारण इसका अनेक रोगों में प्रयोग करके लाभ उठाया जाता है। आँवला केवल काष्ठ औषधियों में ही नहीं, रस औषधियों में भी पूरी तरह उपयोगी रहता है।

अनेक भाषाओं में आंवला  के नाम (Amla Called in Different Languages)

  • हिंदी :– आमला, आँवला, आंवरा, आंबला औरा;

  • संस्कृत नाम :– अमृता, अमृतफल, आमलकी, पंचरसा

  • English :– इण्डियन गूजबेरी (Indian gooseberry);

  • Scientific Names :– रिबीस यूवा-क्रिस्पा

  • Urdu :- आँवला (Anwala);

  • Oriya :- औंला (Onola);

  • Assamese :- अमला (Amla), आमलुकी (Amluki);

  • Kannada :- नेल्लि (Nelli), नेल्लिकाय (Nellikai);

  • Gujarati :- आमला (Amla), आमली (Amli);

  • Tamil :- नेल्लिमार (Nellimaram);

  • Telugu :- उसरिकाय (Usirikai);

  • Bengali :- आमला (Amla), आमलकी (Amlaki);

  • Nepali :- अमला (Amla);

  • Punjabi :- आमला (Amla);

  • Marathi :- आँवले (Anwale), आवलकाठी (Aawalkathi);

  • Malayalam :- नेल्लिका (Nellikka), नेल्लिमारम (Nellimaram)

  • Arabic :- आमलज्ज (Amlajj);

  • Persian :- आमलह (Amlah), आम्लाझ (Amlazh)

आंवला   के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- अम्ल और कषाय

  • गुण (Pharmacological Action): - गुरु/भारी,

  • वीर्य (Potency): - शीत

  • विपाक (transformed state after digestion):- मधुर

आंवला  के गुण : Properties of Amla

आंवला के प्रयोग से अनगिनत फायदे (amla ke fayde) होते हैं। आंवला खून को साफ करता है, दस्त, मधुमेह, जलन की परेशानी में लाभ पहुंचाता है। इसके साथ ही यह जॉन्डिस, हाइपर-एसिडिटी, एनीमिया, रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहने की समस्या), वात-पित्त के साथ-साथ बवासीर या हेमोराइड में भी फायदेमंद होता है। यह मल त्याग करने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। यह सांसों की बीमारी, खांसी और कफ संबंधी रोगों से राहत दिलाने में सहायता करता है। अमला आंखों की रोशनी को भी बेहतर करता है। अम्लीय गुण होने के कारण यह गठिया में भी लाभ पहुंचाता है।

आंवला (Indian gooseberry) शरीर के पित्त, वात और कफ को संतुलित करने में मदद करता है। आंवला, पीपल और हरड़, सभी तरह के बुखार से राहत दिलाने में सहायता करता है। यह दर्द निवारक दवा के रूप में भी काम करता है।

आंवला  से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Amla benefits and Uses (labh) in Hindi

महिलाओं का श्वेत प्रदर रोग :-

इस रोग को और अधिक बिगाड़नेवाले हैं : (i) गुड़ (ii) खटाई (iii) तले पदार्थ (iv) तेज़ मसाले (v) तेज़ मिर्च । इलाज के साथ ही इन सब चीजों का सेवन बंद कर दें।

✦ ताजे आँवले का रस दो चम्मच लें। इतना ही शहद लें। दोनों को मिलाकर चाट लें। यह एक दिन का इलाज है। प्रातः, खाली पेट। ऐसी ही खुराक कुछ दिनों तक, कम से कम चार सप्ताह तक लें। श्वेत प्रदर ठीक हो जाएगा।

✦ एक चम्मच शहद में एक चौथाई आँवले का पाउडर डालकर चाट लें। मगर चाटें आहिस्ता-आहिस्ता ही। यह प्रातः की खुराक है। बस, इसे चार सप्ताह तक रोज़ाना लें। बीच में नागा नहीं। श्वेत प्रदर रोग में बहुत ज्यादा फर्क आ जाएगा। अगला निर्णय अपनी अवस्था देखकर करें तथा कुछ दिन और लेना हो तो अवश्य लें।

पुष्ट व नीरोग बनने के लिए :-

आंवला और शहद खाने के फायदे -वैसे तो आज के जमाने में रहन-सहन के कारण अच्छी सेहत तथा नीरोगता को पाना आसान नहीं। फिर भी आँवले का चूर्ण डेढ़ चम्मच लेकर दो चम्मच शहद के साथ मिलाकर चाटें। ऊपर से गर्म दूध का गिलास पी लें। रोज़ाना लेने से शरीर निरोग रहेगा तथा पुष्ट होगा।

अमला और एलो वेरा जूस के फायदे – अमला और एलो वेरा जूस सुबह तथा शाम दिन में दो बार लेते रहने से शरीर पुष्ट व नीरोगी बनता है रक्त की कमी होना :

यदि खून की कमी हो और रंग पीला पड़ता जाए तो शरीर बुरी तरह क्षीण हो जाता है। आँवले का रस तीन बड़े चम्मच लें। उसमें दो चम्मच शहद डालें। एक बड़ा चम्मच पानी मिलाकर पीना शुरू करें। कुछ ही दिनों में रक्त की कमी पूरी होती जाएगी।

दुर्बल याददाश्त :-

यदि कोई व्यक्ति अपनी कमज़ोर याददाश्त से परेशान है । या किसी बच्चे को पाठ याद नहीं रहता, तो ऐसे में सही उपचार करना चाहिए। आयु के साथ भी याददाश्त घटने लगे तो भी यही करें। प्रातः, बिना कुछ खाए, आँवले का मुरब्बा, एक बड़ा आँवला अथवा दो छोटे आँवले खाकर, गुठली को मुँह में बहुत अच्छी तरह चूसकर, पानी पी लें। इसे नियमित रूप से खाने से याददाश्त तेज हो। जाती है।

पेशाब के समय जलन :-

पेशाब करते वक्त सामान्य न रहकर, कुछ जलन महसूस होती हो तो बड़ी असुविधा होती है।

ऐसे में : (i) कब्ज़ भी संभव है। (ii) पेशाब खुलकर नहीं आता है (iii) वीर्य के शीघ्र पतन होने की संभावना रहती है।

इन तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए, ताजा आँवले का रस निकालें-चार तोले, रस में अढ़ाई तोले शहद मिलाएँ। इतना ही पानी भी डालें। यह खुराक सुबह तथा शाम दिन में दो बार लें। आप कुछ ही दिनों बाद काफी ज्यादा ठीक हो जाएँगे। पेशाब में जलन होना तो चार दिनों में ही बंद हो जाएगा।

खूनी बवासीर :-

बादी वाली बवासीर हो या खून गिरनेवाली, इन दोनों में ही बड़ी परेशानी सहनी पड़ती है। यदि खूनवाली बवासीर हो, तो सूखे आँवले लें। साफ़ करके कूट-पीस कर छान लें। इसके दो छोटे चम्मच चूर्ण प्रातः लस्सी के साथ लेना शुरू करें । कुछ दिनों तक इसे नियमित लेते रहें। बवासीर के साथ रक्त नहीं गिरेगा। रोग ठीक होगा।

गले में छाले :-

यदि गले में छाले पड़ जाएँ तो खाना-पीना कठिन हो जाता है। गले से नीचे कुछ उतरता नहीं। इसके लिए आँवला तथा मुलट्ठी दोनों को अलगअलग पीस लें तथा छान लें। दोनों का वजन बराबर रखें तो ठीक। दोनों के कुल वजन के बराबर मिसरी का चूर्ण डालें व मिलाकर रखें। आधा तोला चूर्ण लेकर एक छोटे गिलास दूध के साथ खाएँ या दूध में इस आँवला-मुलट्ठी चूर्ण को मिलाकर, पी जाएँ। यह गले के छाले खत्म करने में सक्षम है।

कुष्ठ रोग :-

यदि कुष्ठ रोग के आसार हों, लक्षण हों, अथवा कुष्ठ रोग हो ही जाए, तो ऐसे में आँवले का बारीक चूर्ण लेकर फाँकें व पानी पी लें। एक समय में दो छोटे चम्मच चूर्ण की यह। खुराक दिन में दो बार लें। लगातार लेते रहने से कुष्ठ रोग घटने लगता है। धीरे-धीरे ठीक भी हो जाता है।

बलगम का जमे रहना :-

बलगम बनती रहे, और छाती में ही जमती रहे तो उसे बाहर निकाल फेंकने के लिए आँवला तथा मुलठ्ठी बराबर मात्रा में लें। दोनों को कूटकर बारीक करने के बाद उसे अच्छी तरह पीसकर छान लें। यदि इन दोनों को एक साथ पीसेंगे तो मुश्किल होगी। अलग-अलग ही पीसें, फिर मिलाएँ। खाली पेट दो छोटे चम्मच इस चूर्ण को पानी के साथ सुबह और शाम लेते रहें। 5-6 दिनों में कफ बनना भी बंद होगा। बनेगा तो उखड़ता रहेगा। सांस सरल हो जाएगी। जब तक तकलीफ लेश मात्र भी रहे, उपचार जारी रखें।

पेट में कीड़े होना :-

यदि पेट में कीड़े हो जाएँ तो भोजन पचता नहीं। जो कुछ होता है उसे कीड़े ही खा जाते हैं। इन्हें मारने और निकालने के लिए ताजा आँवलों का रस एक बड़ा चम्मच पिलाएँ। इसे पाँच दिनों तक नियमित पिलाते रहें। कीड़े नहीं रहेंगे।

स्वप्नदोष का रोगी :-

amla mishri powder benefits in hindi-यदि किसी को स्वप्नदोष अक्सर हो जाता हो तो यह सीरियस बात है। इसके लिए आवला मिश्री चूर्ण या आँवले का मुरब्बा हर सुबह खाने से यह रोग खत्म हो जाता है। कम से कम चार सप्ताह जरूर खाएँ।

वीर्यविकार :-

वीर्यविकार हो तो आँवले का रस एक तोला तथा शुद्ध शहद एक तोला, दोनों को अच्छी तरह मिलाकर पी लें। इसे 45 दिनों तक पीएँ। वीर्यविकार नहीं रहेगा। धातु शुद्ध होकर पुष्ट भी होगी। पतले वीर्य को गाढ़ा करने के लिए, चूर्ण तैयार कर के रखें। आँवले का बारीक चूर्ण तथा बारीक पिसी हल्दी, दोनों की समान मात्रा लें। इसे तवे पर भूनने के लिए कुछ मात्रा घी की भी डाल लें। ठंडा हो जाने पर इसमें मिसरी का पाउडर दोनों की समान मात्रा डालकर मिलाएँ। कंटेनर में, शीशी में रखें। इसकी एक खुराक, एक छोटे चम्मच के समान लें। इसे गर्म दूध के साथ ही लें। दिन में दो बार प्रातः तथा सायं। दोनों में आठ घंटे का अंतर जरूरी है। इस दवा को लेने से वीर्य गाढ़ा होगा। वीर्य का विकार खत्म होगा।

बाल गिरना :-

यदि बाल अक्सर टूटने, गिरने लगे हों तो सचेत हो जाएँ। उन्हें रोकें वरना गंजापन आते देर नहीं लगेगी। रात के समय कूटे हुए सूखे आँवले का मुट्ठीभर चूर्ण पानी में भिगो दें। पानी डेढ़ गिलास हो। प्रातः इन्हें अच्छी तरह मथकर छान लें। उस पानी से सिर धोएँ। वह बालों को मजबूत करेगा। बालों को जड़ों से निकलने, टूटने नहीं देगा। इतना ही नहीं बाल काले और चमकदार भी होंगे। उनका रूखापन खत्म होगा और वे मुलायम भी होने लगेंगे।

आँखों की ज्योति बढ़ाना :-

यदि आँखों की ज्योति कमजोर होने लगे तो आँवला काम आएगा। हरड़, बहेड़े, आँवले को मिलाकर त्रिफला बनता है। यदि इसमें एक भाग हरड़, दो भाग बहेड़े और तीन भाग आँवले लेकर सभी का बारीक चूर्ण बना लें। दो बड़े चम्मच इस त्रिफला को रात में मिट्टी के बर्तन में भिगोकर रख दें। पानी एक गिलास हो। प्रातः त्रिफला को अच्छी प्रकार से मथकर, छानकर, साफ पानी निकाल लें। उस पानी से अच्छी तरह आँखें धोने से आँखों के रोग खत्म होंगे।और ज्योति भी बढ़ेगी।

खाँसी होना :-

यदि खाँसी है और जा नहीं रही हो, तो एक चम्मच शहद लें, उसमें आँवले का बारीक चूर्ण आधा चम्मच मिलाएँ तथा रोगी को चटाएँ। दिन में दो बार चटाने से, दो-तीन दिनों में खाँसी पूरी तरह से चली जाएगी।

पतले दस्त आना :-

यदि दस्त पतले आते हों तथा रुक न रहे हों, तो आँवले

का बारीक चूर्ण लें। उसमें काला नमक लगाएँ। उसे खाकर पानी पी लें। छोटी डेढ़ चम्मच चूर्ण दिन में दो बार लें। जब तक ज़रूरत समझे। लेते रहें।

गठिया रोग :-

यदि गठिया रोग हो गया हो तो चलने-फिरने में बड़ी तकलीफ होती है। जब तक उसका इलाज नहीं हो जाता तब तक चैन नहीं आता। अंग्रेजी दवाओं पर निर्भर मत रहें, आँवला से रोगमुक्ति संभव है।

पानी 250 ग्राम लें, उसमें दो तोला आँवला चूर्ण डालें। दोगुना गुड़ भी डालें। इन तीनों को उबलने दें। जब पानी मात्र 70 ग्राम रह जाए तो इसकी दो खुराके बनाएँ। आठ घंटे के अंतराल पर, सुबह-शाम पी लें। यह जरूर फायदा करेगा।

परहेज

✦कोई भी नमकीन चीज़ न खाएँ तथा बिना नमक के रोटी खाएँ।

✦अन्य दाल-सब्जियों से परहेज कर, मुंग की दाल खाएँ।

✦दाल में काली मिर्च और सेंधा नमक ही डालें।

✦ऐसा रोगी अपने प्रभावित अंगों को हवा में खुला न रहने दे।

मूत्राशय की पथरी :-

यदि मूत्राशय में पथरी हो, पेशाब कम आता हो, दर्द के साथ बूंद-बूंद आता हो, तो आँवले का बारीक पिसा, छना चूर्ण नमक मिलाकर मूली के साथ खाएँ। मूली के साथ जितनी अधिक मात्रा खा सकते हों उतनी, खाएँ। बारबार खाने से पथरी गलकर निकल जाती है।

कब्ज़ :-

यदि कब्ज़ इतना अधिक हो कि कोशिश करने या जोर लगाने पर भी शौच न उतरता हो, तो रात में सोने से पूर्व एक चम्मच बारीक पिसा आँवले का चूर्ण गुनगुने पानी या दूध से खा लें। इससे कब्ज़ नहीं रहेगा। इस उपचार को कुछ दिनों तक लगातार अवश्य करें।

बच्चों का तुतलाना :-

यदि छोटे बच्चे तुतलाते हैं तो उनकी कोई बात समझ में नहीं आती। दोस्त अक्सर मजाक उड़ाते हैं। नकलें उतारते हैं। बच्चा खोजकर रोने लगता है। माँ समझाकर चुप कराती है। ऐसे बच्चे को यदि पका आँवला देकर उसे धीरे-धीरे चबाने और चूसने को कहें। एक दिन में, सुबह से शाम तक तीन आँवले चबा ले। थोड़े ही दिनों में जुबान की तुतलाहट बंद हो जाएगी।

सुजाक में आंवला के फायदे (Benefits of Amla in Gonorrhea in Hindi) :-

सुजाक या गोनोरिया यौन संक्रमित रोग (एसटीडी) है। इस बीमारी में लिंग के अंदर घाव हो जाता है जिससे पस निकलता है। इसके लिए 2-5 ग्राम आंवला के चूर्ण को एक गिलास जल में मिला लें। इसे पिलाएं, और इसी जल से लिंग को धोएं। इससे सूजन और जलन शान्त होती है। इससे धीरे-धीरे घाव ठीक होता है और पीव आना बन्द हो जाता है।

हिचकी से आराम दिलाये आंवला (Uses of Amla for Hiccup in Hindi) :-

हिचकी की परेशानी को ठीक करने के लिए पीपल, आंवला तथा सोंठ के 2-2 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम खांड तथा 1 चम्मच मधु मिला लें। इसे थोड़ी-थोड़ी देर में चाटने से हिचकी तथा दमा में लाभ होता है।

10-20 मिली आंवला रस तथा 2-3 ग्राम पीपल के पत्ते के चूर्ण में 2 चम्मच शहद मिला लें। दिन में दो बार सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।

बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के लिए आमला के फायदे (Amla Beneficial to Control the Effect of Ageing in Hindi) :-

बढ़ती उम्र के प्रभाव को आंवला के सेवन के रोका जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार आंवला को रसायन माना गया है। यहाँ पर रसायन को मतलब जिसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। रसायन के सेवन से  शरीर में होने वाले डिजेनरेटिव को रोकने में सहायता मिलती है जिससे बढ़ती उम्र के लक्षण कम होने लगते है।

हड्डियों को मज़बूत बनाने में आमला के फायदे (Benefit of Amla for Strong Bones in Hindi) :-

आंवला रसायन होने के के कारण सभी शरीर की सभी धातुओं को पोषण देता है। अतः यह अस्थि धातु को भी पोषण देकर हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।

कैंसर से बचने के लिए आंवले का उपयोग (Use of Amla to Prevent Cancer in Hindi) :-

आंवले का सेवन कैंसर को फैलने रोकने में भी सहायक होता है, क्योंकि इसमें कैंसर रोधी तत्व पाये जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार भी आंवला रसायन होता है यानि रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने बढ़ाता है अतः  ये कैंसर को रोकने में मदद करता है।

हृदय को स्वस्थ रखने में आंवले के फायदे (Amla Beneficial for Healthy Heart in Hindi) :-

आंवला का सेवन हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक होता है, क्योंकि आंवले का सेवन कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करता है साथ ही आंवले में पाये जाने वाला विटामिन-सी रक्तवाहिनी को संकुचित होने से रोकता जिसे रक्त का दबाब भी सामान्य रहता है

पीलिया में लाभकारी आंवला (Amla Benefits in Jaundice in Hindi) :-

कामला को पीलिया भी कहते हैं। पीलिया होने पर त्वचा का रंग पीला हो जाता है और शुरुआती स्थिति में इलाज नहीं होने पर यह गंभीर हो सकता है।

आंवले की चटनी बनाकर उसमें शहद मिला लें। इसका सेवन करने से लिवर विकार और पीलिया (amla ke fayde) में लाभ होता है।

125-250 मिग्रा लौह भस्म के साथ 1-2 नग आंवले के चूर्ण का सेवन करने से पीलिया और एनीमिया में लाभ होता है।

आंवले की तासीर :-

आमला एक प्रकार का स्वादिष्ट फल होता है। जिसमें आयुर्वेद के अनुसार लवण रस को छोड़कर पांचों रस पाए जाते हैं, जिसमें अम्ल और कषाय प्रधान होता है। आंवले की तासीर शीत यानि ठंडी होती है अर्थात इसके सेवन से शरीर शीतल होती है।

आंवला  के सेवन का तरीका (How to Use Amla?) :-

आप आंवले का सेवन कई तरह से कर सकते हैं। आंवले का कच्चा फल, आमला जूस, आमला चूर्ण, आमला कैंडी या आंवले का मुरब्बा बनाकर इसका सेवन किया जा सकता है। इस लेख में ऊपर यह बताया गया है कि कौन सी बीमारी में कितनी मात्रा में आंवले का सेवन करना चाहिए। यहां यह बात ध्यान रखिये कि बहुत अधिक मात्रा में आंवले का सेवन करने से आंवला के नुकसान हो सकते हैं। इसलिए अगर आप किसी बीमारी के घरेलू उपाय के लिए आंवले का सेवन करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेकर सेवन करें।

आंवला  के नुकसान  (Side Effects of Amla) :-

आमला का प्रयोग करने से किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है, लेकिन इसकी तासीर शीत होने के कारण इसका सर्दी में फल रूप में प्रयोग करने से बचना चाहिए।

आंवला  कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is AMLA Found or Grown?) :-

आमला का वृक्ष (amla plant) की पत्तियां इमली की पत्तियां जैसे ही होती हैं, लेकिन इसकी पत्तियां इमली से कुछ बड़ी होती हैं। आंवला (Indian gooseberry)  बाग-बगीचों से लेकर जंगलों में पाया जाता है। बाग-बगीचों में आंवले के जो पौधे होते हैं उनमें जो फल आते हैं, वे जंगल में पैदा होने वाले फल की तुलना में बड़े होते हैं। ये समुद्र तल से 1300 मीटर की ऊंचाई पर भी पाया जाता है।

ध्यान दें :- Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको आंवला के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |